कलेक्टर ने की शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा केंद्र और जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा
शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की उपस्थिति वृद्धि और शैक्षणिक सुधार पर फोकस
कम्प्यूटर लैब, स्मार्ट टीवी और इंटरैक्टिव पैनल का हो समुचित उपयोग, विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा पद्धति का मिले भरपूर लाभ – कलेक्टर
खेल – खेल में बढ़ाएं विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता
छात्रावासों के विद्यार्थियों की देखभाल अपने बच्चों की तरह करें अधीक्षक – कलेक्टर
जिले के सरकारी स्कूलों की शिक्षा के स्तर को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर ने गुरुवार को शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा केंद्र और जनजातीय कार्य विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक ली। कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में विद्यालयों की शैक्षणिक स्थिति, छात्रावासों के संचालन, शैक्षणिक संस्थाओं की मॉनिटरिंग व्यवस्था, गत वर्ष के परीक्षा परिणाम आदि की गहन समीक्षा की गई। साथ ही विद्यार्थियों व शिक्षकों की उपस्थिति बढ़ाने, शिक्षण व्यवस्था तथा निगरानी को और बेहतर करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा – निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों में नियमित शिक्षण-अधिगम गतिविधियाँ संचालित हों, शिक्षकों की पूर्ण उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और शत प्रतिशत विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाए। उन्होंने विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, ई-लर्निंग संसाधनों और कंप्यूटर लैब के सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन भी स्कूलों में कंप्यूटर लैब, स्मार्ट टीवी और इंटरैक्टिव पैनल हैं, उनका सभी शिक्षक अध्यापन कार्य के दौरान उपयोग करें और विद्यार्थियों को नवीन शिक्षा पद्धति का भरपूर लाभ मिल सके। इनके माध्यम से रुचिकर तरीके से खेल – खेल में अध्यापन कार्य करते हुए विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारें।
छात्रावासी बच्चों का रखें पूरा ध्यान – जनजातीय क्षेत्रों के विद्यालयों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने कहा कि जनजातीय विद्यार्थियों की उपस्थिति और शैक्षणिक परिणामों में सुधार के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। साथ ही, आश्रम शालाओं एवं छात्रावासों में विद्यार्थियों के पोषण, सुरक्षा और अध्ययन वातावरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने गत दिवस हर्रई छात्रावास के निरीक्षण में सामने आई कमियों पर नाराजगी जाहिर करते हुए यह स्पष्ट निर्देश दिए कि छात्रावासी बच्चों को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल की उपलब्ध कराया जाए और शासन की गाइडलाइन के अनुसार उन्हें हर सुविधा का लाभ दिया जाए, यही हमारा दायित्व है। छात्रावास अधीक्षक अपने बच्चों की तरह ही छात्रावास के विद्यार्थियों की समुचित देखभाल सुनिश्चित करें। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मॉनिटरिंग पर विशेष जोर – कलेक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा कि औचक निरीक्षण में उजागर हुई कमियां इन तीनों विभागों के जिला, खंड स्तरीय अधिकारियों बीईओ, बीएससी और जनशिक्षकों की कमजोर मॉनिटरिंग को दर्शाती हैं। सरकारी शैक्षणिक संस्थाओं की समुचित शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मॉनिटरिंग के लिए ही शासन द्वारा इन पदों का सृजन कर दायित्व सौंपे गए हैं। सभी अपनी जवाबदेही को गंभीरता से लें और अपने पदीय दायित्वों का उचित ढंग से निर्वहन सुनिश्चित करें। उन्होंने अगली बैठक में स्कूल विजिट की जानकारी के साथ ही विजिट में सामने आई कमियां और अच्छे कार्यों पर भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, जिससे कमियों को दूर करने के उपाय निकाले जा सकें और अच्छे कार्यों का उदाहरण पेश करते हुए अन्य शिक्षकों को भी प्रेरित किया जा सके।
बैठक में एसडीएम परासिया, जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, डीपीसी, सहायक संचालक शिक्षा, बीआरसी, तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर ने इन सभी विभागों से सामूहिक प्रयासों के माध्यम से जिले की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया।
