कलेक्टर ने की खाद वितरण एवं भावांतर योजना की समीक्षा
कृषि विस्तार अधिकारियों की उपस्थिति में होगा प्राइवेट दुकानों से खाद का वितरण
जिले में है खाद की पर्याप्त उपलब्धता, भंडारण और वितरण सुचारू रहे
रबी सीजन के सुचारू संचालन को लेकर कलेक्टर द्वारा खाद वितरण एवं भावांतर भुगतान योजना की नियमित समीक्षा की जा रही है। शुक्रवार को भी उन्होंने कलेक्टर कार्यालय के मिनी सभाकक्ष में बैठक लेकर इसकी समीक्षा की और जिले में खाद की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए सुचारु एवं पूरी पारदर्शिता के साथ वितरण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिये । बैठक में उप संचालक कृषि सिंह सहित कृषि विभाग, सहकारिता, मार्कफेड एवं जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अधिकारी उपस्थित थे।
जिले में उर्वरक भण्डारण एवं वितरण की सुचारू व्यवस्था के लिए सभी फुटकर एवं थोक विक्रेताओं को अपने प्रतिष्ठानों में मूल्य सूची एवं स्टॉक प्रदर्शन अनिवार्यतः करने एवं अन्य उत्पादों के टैगिंग किये बिना निर्धारित मूल्य पर ही उर्वरक विक्रय करने के निर्देश दिए हैं। निजी उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों में शासन द्वारा निर्धारित दर पर उर्वरक विक्रय सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है। नियुक्त अधिकारी/कर्मचारी प्रतिदिन विक्रेता के प्रतिष्ठान का उर्वरक स्टॉक अपने समक्ष ओपनिंग एवं क्लोजिंग कर उर्वरक स्टॉक की जानकारी अनुविभागीय कृषि के माध्यम से उपलब्ध कराएंगे।
बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि किसानों को खाद वितरण में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उर्वरकों का समुचित भंडारण एवं सुचारू वितरण सुनिश्चित किया जाए। किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर खाद उपलब्ध कराएँ। अभी ज़िले में लगभग 6000 मीट्रिक टन यूरिया एवं 10435 मीट्रिक टन डीएपी एनपीके खाद उपलब्ध है । माँग अनुसार लगातार खाद ज़िले को प्राप्त हो रही है ।
भावांतर भुगतान योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि मध्यप्रदेश में भावांतर योजना के अंतर्गत सोयाबीन फसल की विक्रय अवधि 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक नियत की गई है। योजना केवल राज्य की अधिसूचित मंडियों में ही मान्य है। जिले की 3 अधिसूचित मंडियों के माध्यम से अभी तक 304 पंजीकृत किसानों द्वारा 5776 क्विंटल सोयाबीन का विक्रय किया गया है।
