आरबीएसके योजना की मदद से 6 वर्षीय मासूम को मिला नया जीवन
हार्ट के सफल ऑपरेशन से गंभीर हृदय रोग की पीड़ा से मिली मुक्ति
जिले के आदिवासी विकासखंड बिछुआ के ग्राम डोडाखापा के मवासी जनजाति के 6 वर्षीय बालक विशाल सीलू का बचपन कभी गंभीर हृदय रोग की पीड़ा में बीत रहा था। दिल की बीमारी ने उसके सामान्य जीवन को कठिन बना दिया था। लेकिन केंद्र सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके), मध्यप्रदेश सरकार के आर्थिक सहयोग और जिले के समर्पित डॉक्टरों के प्रयासों ने इस मासूम के जीवन में नई रोशनी भर दी है।
पहली बार वर्ष 2023 में आरबीएसके टीम के और ने बच्चे की स्थिति को गंभीर मानते हुए उसे सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल भोपाल भेजकर निःशुल्क हार्ट ऑपरेशन करवाया। ऑपरेशन सफल रहा और विशाल को राहत मिलने लगी।
लेकिन परिवार के बार-बार पलायन और उच्च संस्थान में नियमित जांच न करा पाने के कारण वर्ष 2024 में उसकी हालत फिर बिगड़ गई। असामान्य दिल की धड़कन और बढ़ती सूजन देखकर स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई। कलेक्टर छिंदवाड़ा, जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और डी.ई.आई.सी. के निर्देशन में आयोजित शिविर में एसआरसीसी हेल्थ मुंबई की टीम ने जांच कर तत्काल उपचार की आवश्यकता बताई। तत्काल उपचार शुरू हुआ, लेकिन परिजन अचानक उसे जिला अस्पताल से घर ले गए दूसरे ऑपरेशन से मना कर दिया। इस चुनौतीपूर्ण समय में पूरी स्थिति एसडीएम चौरई और सीबीएमएम के समक्ष रखी। तत्काल टीम गठित की गई और परिवार को फिर उपचार के लिए सहमत कराया गया।
इसी बीच समाज का सहयोग भी इस कहानी में शक्ति बनकर उभरा—सांसद, सबका भला सेवा समिति बिछुआ तथा आंगनबाड़ी सुपरवाइजर ने बच्चे और परिजन की मुंबई यात्रा के लिये आर्थिक सहयोग एवं रिजर्वेशन की व्यवस्था की।
हौसलों की उड़ान जब आसमान छू लेती है,
तो छोटी-सी जान भी बड़ी कहानी कह देती है।
दर्द कितना भी गहरा हो,
उम्मीद कभी हारती नहीं है।
10 अगस्त 2025 को बच्चे को मुंबई पहुँचाया गया। 25 अगस्त 2025 को एसआरसीसी नारायणा हेल्थ में दूसरा हार्ट ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। इस दौरान मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 2.5 लाख तथा नारायणा हेल्थ एनजीओ द्वारा लगभग 3.30 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई।
ऑपरेशन के बाद भी सहयोग का सिलसिला जारी रहा। आरोग्य अस्पताल छिंदवाड़ा ने 2D ईको एवं कार्डियोलॉजिस्ट परामर्श निःशुल्क उपलब्ध कराया। आरबीएसके टीम के डॉ. मराठा एवं एएनएम प्रागवती तुमडाम ने अपने निजी खर्च से दवाइयाँ उपलब्ध कराईं।
आज विशाल पूरी तरह से स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है। यह सिर्फ एक बच्चे की नहीं, बल्कि सरकार, प्रशासन, स्वास्थ्य टीम और समाज के सामूहिक प्रयासों की जीती-जागती सफलता की कहानी है—जो यह संदेश देती है कि जब संवेदना और सेवा एक साथ चलें, तो हर असंभव भी संभव हो जाता है।
