विश्व गौरैया दिवस पर मनाया गया गौरैया संरक्षण दिवस
पक्षी मित्रों ने जगह-जगह पेड़ों पर टांगे मिट्टी के जल पात्र
समाजसेवियों ने लिया गौरैया संरक्षण का कार्य
विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर शहर में समाजसेवियों द्वारा पक्षियों के संरक्षण के लिए विशेष पहल की गई। जन अभियान परिषद छिंदवाड़ा के तत्वावधान में स्थानीय पीजी कॉलेज परिसर में लगे पेड़ों पर मिट्टी के सकोरे टांगे गए और उनमें पानी भरकर पक्षियों के लिए पेयजल की व्यवस्था की गई।
इस दौरान जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक, पक्षी विशेषज्ञ सहित सीएमसीएलडीपी के बीएसडब्ल्यू एवं एमएसडब्ल्यू के छात्र-छात्राएं और अन्य समाजसेवी उपस्थित थे।
जागरूकता कार्यक्रम में पर्यावरणविद ने कहा कि इस अवसर पर सभी लोग पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था कर रहे हैं और यह एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि घर-आंगन में फुदकने वाली नन्ही गौरैया अब कम दिखाई दे रही है और विलुप्त होती नजर आ रही है। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए घरों में बर्ड हाउस रखने की आवश्यकता है, जिससे गौरैया को सुरक्षित आवास मिल सके।
जिला समन्वयक ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए सभी प्रकार के पक्षियों का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने अपील की कि विशेषकर गर्मियों में घरों और छतों पर नियमित रूप से पक्षियों के लिए पानी और दाना रखा जाए।
पर्यावरण मित्र डॉ. लता नागले ने विद्यार्थियों से अपने घरों, आंगन और गांव में पौधारोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि फलदार और छायादार पेड़ पक्षियों को विश्राम और घोंसला बनाने के लिए उपयुक्त स्थान प्रदान करते हैं। समाजसेवी ने कहा कि आधुनिक पक्के मकानों के कारण पक्षियों को घोंसला बनाने में कठिनाई हो रही है। साथ ही मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगें और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग भी पक्षियों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रहा है। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने गौरैया सहित सभी पक्षियों के संरक्षण की शपथ ली और समाज के प्रत्येक वर्ग से इस दिशा में आगे आने का आह्वान किया।
