जॉर्ज साहेब का जन्म मंगलौर( कर्नाटक ) में हुआ था ,पिता जी उन्हें पादरी बनाना चाहते थे परंतु वे समाजवादियों के संपर्क में आने विशेष तौर पर श्रमिक नेता पी डिमैलो से मिलने के बाद भागकर मुम्बई पहुंचे और ट्रेड यूनियन से जुड़ गए । कार्यालय की बेंच पर सोकर कई वर्ष गुजारे , वकील रंजीत भानु से मुलाकात हुई ,यूनियन के कार्यालय की जगह एक कमरा रहने को मिला ,पूरी ताकत झोंककर होटल के बेरों को संगठित किया ,गुमठी वालों को जोड़ा ,शक्तिशाली मज़दूर संगठन कर लिया । म्युनिसिपल यूनियन गठित की ,टैक्सी मैन यूनियन बनाई । श्रमिकों का सहकारी बैंक की बुनियाद डाली ।
समाजवादी आंदोलन के बड़े नेताओं से संपर्क हो गया।……………..
कांग्रेस के उस समय के सबसे बड़े नेता एस के पाटिल को हराकर मुम्बई के सांसद बनकर दिल्ली पहुंचे। उन्हें जॉइंट किलर कहा जाने लगा। पहले ही झटके में पूंजीशाही को परास्त करने के बाद वे आजीवन पूंजीवादियों के आंखों की किरकिरी बने रहे ।
स्वाभाविक तौर पर समाजवादियों के राष्ट्रीय नेता बन गए ।फिर कभी मुड़कर नहीं देखा । श्रमिकों की दम पर एक आवाज़ पर मुम्बई बन्द कराने की ताकत हासिल कर ली। सड़कों पर उनसे मुकाबला करने की ताकत बाल ठाकरे के अलावा कोई हासिल नहीं कर पाया।यह ठाकरे फ़िल्म में भी दिखाया गया है। समाजवादी होने के नाते वैचारिक तौर मुकाबला बाल ठाकरे से था लेकिन दोनो एक दूसरे का अत्यधिक सम्मान किया करते थे।
वे सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष भी रहे , डॉ लोहिया के गैर कांग्रेस बाद के विचार को उन्होंने मूर्त रूप दिया । पूरा जीवन संघर्ष में बिताया।
हिन्द मज़दूर किसान पंचायत और हिन्द मज़दूर सभा का भी उन्होंने अध्य्क्ष के तौर पर नेतृत्व किया। उनके ही नेतृत्व में देश में ऐतिहासिक रेल हड़ताल हुई । इंदिरा गांधी ने देश पर इमरजेंसी थोप दी ,जिसका जॉर्ज फ़र्नान्डिस ने भूमिगत रहकर विरोध किया। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस पीछा करती रही वे वेश बदलकर घूमते रहे ,अंततः उनको पकड़ा गया ।पुलिस द्वारा टार्चर किया गया। देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर उन्हें डायनामाइट कांड में फंसाने की कोशिश हुई उस समय यदि दुनिया के सोशलिस्ट विशेषकर जर्मनी के चांसलर विली ब्रांत हस्तकछेप नहीं करते तो उन्हें फांसी तक देने का सडयंत्र किया गया था। जेल से ही वे मुजफ्फरपुर से चुनाव जीते ,उन्हें चुनाव लड़ने का प्रस्ताव मेरे गुरुदेव प्रोफेसर विनोद प्रसाद सिंह जी के द्वारा दिया गया था।
वे सोशलिस्ट पार्टी का जनता पार्टी बनाने के लिए विलय हेतु तैयार नहीं थे लेकिन लोकनायक जय प्रकाश नारायण जी के आदेश को टालना समाजवादियों के लिए संभव नहीं था ,पार्टी का विलय को गया जिसका पश्चाताप जीवन भर उन्हें रहा ,इसी कारण उन्होंने बाद में 14 सांसदों के साथ समता पार्टी बनाई।

जनता पार्टी सरकार में वे उद्योग मंत्री बनाये गए ,उन्होंने कोका कोला और आई बी एम जैसी बहुराष्ट्रीय कॉम्पनियों को देश से निकाल बाहर किया । जिला उद्योग केंद्र बनाकर छोटे उद्योगों में नई जान फूंकी ।
समाजवादियों ने आर एस एस के दोहरी सदस्यता का सवाल उठाया ,जनता पार्टी के तम्माम ऐतिहासिक कार्यक्रमों को लागू करने के बाद भी प्रधानमंत्री मोरारजी भाई की हठधर्मिता और संघीयो के सरकार में अत्यधिक हस्तकछेप के चलते जनता पार्टी टूट गई। संसद में जब अविस्वास प्रस्ताव आया तब जॉर्ज साहेब ने जोरदार भाषण देकर सरकार को डिफेंड किया ,बाद में मधु लिमये जी एवम अन्य समाजवादियों के सुझाव पर इस्तीफा दे दिया ।जिससे उनकी छवि को बहुत धक्का पहुंचा। कुछ समयलोकदल( कर्पूरी) ,दमकीपा बनाया । जनता दल के गठन में उनकी …

जनता दल के गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही ,रक्षा मंत्री बनाये गए । ऐसा रक्षा मंत्री जिनके दरवाजे सदा लोगों के लिए खुले रहते थे । सीधे सैनिकों से संबंध रखा । उन्हें भरस्टाचार में फंसाने की कोशिश की गई लेकिन उनके जीते जी कोई आरोप साबित नहीं हुआ।जिससे पता चलता है कि जब सरकारें जॉर्ज साहेब से सड़क से लेकर संसद तक मुकाबला नहीं कर सकीं तक उनको बदनाम करने की असफल कोशिश की गई।
जनता दल की सरकार भी मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू करने के बाद भारतीय जनता पार्टी द्वारा समर्थन वापस ले लिया गया सरकार गिरा दी गई । मंदिर मस्जिद विवाद खड़ा कर दिया गया। उस समय भी जॉर्ज साहेब मुसलमानों के साथ वैसे ही खड़े रहे जैसे वे सिखों के साथ आपरेशन ब्लू स्टार के बाद खड़े रहे थे।
वे वैश्विकरण ,निजीकरण और उदारीकरण के प्रखर विरोधी रहे।
उन्होंने समता पार्टी बनाकर बिहार में लालू यादव का विकल्प खड़ा किया ,नीतीश को बिहार की राजनीति में स्थापित किया,मुख्यमंत्री बनाया।
उन्होंने अछूत मने जाने वाली
भा ज पा को वैधानिकता प्रदान की ।उनके बिना एन .डी . ए का गठबंधन बन ही नहीं सकता था वे गठबंधन की रीढ़ थे।इस तरह वे जीवन भर वे गैर कांग्रेस वाद के झंडाबरदार बने रहे।हालांकि उनके इस कदम से समाजवादी आंदोलन को बहुत नुकसान हुआ।
अचानक उनकी तबियत एक दिन 3 कृष्णा मेनन मार्ग के घर में कपड़े धोते वक्त गिरने के कारण सिर में चोट लगने से बिगड़ती गई ,कई आपरेशन हुए।
कुछ ही वर्षों में एल्जाइमर्स के शिकार हो गए।
कई वर्षों तक दी अदर साइड मासिक पत्रिका को उनकी निकटस्थ सहयोगी जया जेटली ने निकाल कर उनके विचार को जिंदा रखने की कोशिश की ।उनके समर्थक जॉर्ज फ़र्नान्डिस का जन्मदिन देश भर में मनाते रहे। तिबतियों और बर्मा के आंदोलन कारियों ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा ,पूर्वोत्तर ,कश्मीर घाटी और पंजाब के लोगों से उनका रिशता आजन्म बना रहा । हालांकि उन्होंने सबसे अधिक बिहार का प्रतिनिधित्व किया । लेकिन वे देश के नेता थे।
आज सुबह महान समाजवादी नेता का देहांत हो गया।कल रात को सोए तो सुबह उठे ही नहीं।………
मेरा जॉर्ज साहेब से छात्र जीवन से संबंध बना ,मैने उनसे से संघर्ष के तौर तरीके सीखे ,बोलना सीखा,समाजवादी विचार का प्रशिक्षण लिया । संघर्ष के लिए संख्या महत्वहीन होती है ,यह वे मानते भी थे और कम संख्या होने के बावजूद संघर्ष से पीछे नहीं हटते थे ।मैं खुद उनके साथ था जब उन्होंने 4 लोगों के साथ जंतर मंतर पर राष्ट्र मंडल खेलों के विरोध में सत्याग्रह कर गिरफ्तारी दी थी।
प्रतिपक्ष पत्रिका जिसके जॉर्ज साहेब प्रधान संपादक थे ,असल में पुनः प्रकाशन शुरु होने के संपादन प्रोफेसर विनोद प्रसाद सिंह जी किया करते थे ,मैंने उनसे ही लिखना सीखा।गत कई वर्षों से जॉर्ज साहेब शारीरिक तौर पर मेडिकली या क्लीनिकली तो जिंदा थे ,लेकिन किसी को पहचानते नहीं थे ,कुछ बोल नहीं सकते थे ।मैं लैला जी के पास जाकर उनके दर्शन नियमित करता रहता था। लैला जी ने बहुत सेवा की, जिसकी कल्पना करना भी कठिन है ।जिसदिन जॉर्ज साहेब को देखता कम से कम 24 घंटे उनका चेहरा आंखों के सामने घूमता रहता ,जीवन के प्रति विरक्ति पैदा होने लगती ।अपने प्रेरणा स्रोत को असहाय ,निसहाय हालत में देखना बहुत ही पीड़ा दायक होता था।देखने वाले की यह हालत होती तो जॉर्ज साहेब की पीड़ा समझी जा सकती थी। हम कह सकते हैं मौत से उनके शरीर की मुक्ति हो गई।

जॉर्ज फ़र्नान्डिस की मौत से अंतराष्ट्रीय समाजवादी आंदोलन को अपुर्णीय छती हुई है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकेगी ।उन्होंने आजीवन खादी पहनी ,अपने कपड़े खुद धोए ,तकिए के नीचे रात को रखकर सुबह पहने ,आजीवन लिखना पढ़ना ,देश और दुनिया में होने वाली हर घटना पर निगाह रखन…उसपर बोलना लिखना । जो जहां जब मिले खा लेना ,अपनी गाड़ी खुद चलाना।मनुष्यों से ही नहीं प्रकृति ,पशु ,पक्षियों तक से प्रेम करना ।हर किस्म के अन्याय,अत्याचार ,शोषण ,लूट और भष्ट्राचार के खिलाफ संघर्ष करना जॉर्ज साहेब की फितरत थी।सबसे सदा मिलने के लिए तैयार रहते थे।तिब्बत की आज़ादी और वर्मा में लोकतंत्र की बहाली के लिए उन्हीने आजीवन कार्य किया। जॉर्ज साहेब का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को यह भरोसा दिलाता रहेगा कि संघर्ष ,सेवा और राजनीति करने के लिए किसी विशेष जाति ,धर्म और वर्ग में पैदा होने की जरूरत नहीं होती , दृढ़ संकल्प शक्ति ,वैचारिक स्पष्टता और मजबूत संगठन से सब कुछ किया जा सकता है।

2,617 thoughts on “सडक से संसद तक संघर्ष करने वाले समाजवादी योद्धा जॉर्ज फ़र्नान्डिस का निधन”
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