जी हां मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिला का लगभग आधा भाग कोयला खदानों के कारण कोयलांचल कहलाता है जिसको दो भागों में बांटा गया था एक इलाका वेकोलि कन्हान एरिया एवं दूसरा कोल इलाका वेकोलि पेंच एरिया इन  सूत्र बताते हैं की दोनों ही मुख्य महाप्रबंधक कार्यालयों को विलय करने का निर्णय ले लिया गया था फिर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल अपनी अपनी योग्यता के हिसाब आंदोलन में लग गए जिसमें भाजपा की तरफ से परासिया के पूर्व विधायक ताराचंद बावरिया ने मोर्चा संभाला ,कांग्रेस की तरफ से परासिया विधायक सोहन लाल बाल्मीकि के साथ सुनील उईके कप्तान थे ।

कांग्रेस ने मोटरसाइकिल रैली निकाली तो उसी दिन आनन फानन में भाजपा के नेताओं ने भोपाल में मुख्यमंत्री के पास डेरा डाल दिया भाजपा से जुड़े जानकर बताते हैं कि उनके साथ व्यपारी लोगों का प्रतिनिधि मंडल भी भोपाल गया हुआ था वहीं से कुछ कार्यकर्ताओं ने फोटो भी पोस्ट की और हुआ सोशल मीडिया में कॉपी पेस्ट का खेल  ।

कुछ अखबार में भी छप गया कि मुख्यमंत्री ने कोयला मंत्री से बात की है जिस खबर बताई गई थी कि कोयला मंत्री ने आश्वासन दिया है कि कोयला खदानों को बंद नहीं किया जाएगा वहीं दूसरे समाचारों में यह बात भी आई कि जिले के सांसद ने भी कोयला खदानों के बन्द होने के सम्बंध में कोयला मंत्री से चर्चा की है ।

सवाल उठता है कि बगैर एनालिसिस किये भाजपा कांग्रेस दोनों दल के कार्यकर्ता अपने अपने आकाओं को बधाई देते हुए सोशल मीडिया में देखे गये और यही नहीं एक दूसरे आपस में भिड़ते हुये भी दिखे ।

सच्चाई कुछ और ही निकली जब महाकौशल न्यूज़ के स्टेट हेड ने मुख्यमंत्री सचिवालय में जनसंपर्क अधिकारी श्री चौधरी जी से इस मुददे पर बात की तो उन्होंने बताया कि खदानों को बंद न होने संबंधी कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है उन्होंने आगे बताया कि मुख्यमंत्री जी दिल्ली गए तो थे मगर कोयला मंत्रालय से कोई आदेश लेकर आए हुए होते तो उसका विज्ञप्ति जारी किए जाते

आखिर सवाल उठता है कि यह कॉपी पेस्ट बनाकर बगैर एनालेसिस किये खबरें वायरल होने से भ्रम पैदा होता है मतलब हुआ ये की खदानों के मामले  मैं कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है।

अब होता है खबरें  की विश्वनीयता भी कुछ मायने रखती है

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