गोंडवाना समुदाय के चार वंश 750 गोत्रों में विभक्त हैं। विद्वान और साहित्यकार अपने माता-पिता को देवता मानते हैं, जिनका सेवाभाव ही मूलमंत्र है। वहीं गोंडी धर्मानुसार प्रकृति शक्ति पृथ्वी, वायु, अग्नि, जल, आकाश को भगवान मानते हैं। जिनके बिना समूचे जगत में जीवन संभव नहीं है। वर्तमान परिवेश में यही समुदाय अपने मूल रास्ते से भटक गया है यहां तक कि अंध विश्वास एवं कुरीतियों से ग्रसित होकर गुलामी के जंजीर में बंधता जा रहा है, जिसका मूल कारण पिछड़ापन व जागरुकता का अभाव है।