त्वरित टिप्पणी ……

नई दिल्ली । जिस प्रकार से कल कर्नाटक राज्य में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आए उसमें कुल 222 सीटों पर  104 में भाजपा, 78 पर कांग्रेस 37 पर जेडीएस एवं 3 पर अन्य ने जीत हासिल की है ।   सरकार बनाने के लिए 112 विधायक की संख्या बल जिस के पास है उसे सरकार गठन का न्योता दिया जाता है इस आंकड़े मैं कांग्रेस और जेडीएस दोनों ने मिलकर अपनी पर्याप्त संख्या बल 115 विधायक का संख्या सूची सहित सरकार बनाने का दावा भी पेस कर दिया, पर सत्ता की भूख इस हद तक जा सकती भाजपा की संख्या बल नहीं होने के बाद भी इनके तानाशाही नेताओं ने यदुरप्पा ने राज्यपाल के पास जाकर चिट्ठी सोपते हैं कि हम बड़ी पार्टी हैं हमको सरकार बनाने का मौका दिया जाए भाजपा 1 सप्ताह में हम विश्वास मत विधानसभा में साबित कर देंगे बात तो सही है भाजपा नेता ही राज्यपाल हैं ,केन्द्र में भाजपा की ही सरकार है तो जाहिर है यदुरप्पा को विधायक लोगों की खरीद फरोख्त करने की छूट दे दी गई फिर भाजपा के दो बड़े मुख्य तानाशाह लोगों ने तीन केंद्रीय मंत्रियों को कोहराम मचाने को कर्नाटक भेज दिया कि जाओ खरीद फरोख्त करो ,कांग्रेस के विधायक खरीदो धमकी देकर उन्हें तोड़ कर भाजपा मैं लाओ ,जेडीएस के विधायकों को फूट डालो खरीद कर लो , इन सभी प्रकार की भाजपा की ओछी हरकत से ,सत्ता की इस कदर भूख से ,खुलेआम खरीद फरोख्त से  शायद लोकतंत्र भी अपने आप मैं घायल नजर आ रहा है सिसक रहा होगा की भाजपा शायद लोकतंत्र की हत्या ही न कर दे बताया गया है कि इसके पहले देश के प्रधानमंत्री मोदी ने कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक मंच से खुलेआम धमकी देते हुए कहा था कि देख लूंगा ,आखिर प्रधानमंत्री किसी दल का ही बस नहीं रह जाता वह देश की सम्पूर्ण जनता का प्रधानमंत्री हो जाता है शायद इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने

इस प्रकार की असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया गया होगा भाजपा की इस प्रकार की हरकतों से लगता है कि भविष्य में भारत में जल्द ही तालिबान जैसे हालात से इंकार नहीं किया जा सकता संकेत हैं यह तो भाजपा की तानाशाही शासन की शुरुआत हो गई है ।

बहरहाल कर्नाटक में जो नाटक चल रहा है उस के सुखदअंत हो और वहां के राज्यपाल अपने पद की गरिमा का ध्यान रखते हुए कांग्रेस, जेडीएस गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करे तो शायद लोकतंत्र की आत्मा कही अपने आप को ठगा महसूस न करे ।

44 thoughts on “लोकतंत्र का गला घोंट दिया ,शायद भारत मैं तानाशाही आहट तो नहीं ??”
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