विशेष संवाददाता

इंदौर । रावण महाज्ञानी थे, उन्हें बुराई का प्रतीक बताकर सदियों से हर साल दशहरे पर उनका पुतला दहन किया जा रहा है। इससे न सिर्फ वायु प्रदूषण होता है बल्कि ब्राह्मण समाज का अपमान भी हो रहा है, क्योंंकि  दीवानी केस (याचिका) का जो जिला कोर्ट में दायर हुआ है। केस में अंतरिम राहत मांगते हुए वादी ने रावण दहन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। बताया जाता है कि

केस कोर्ट में यह केस धर्मेंद्र शुक्ला, प्रहलाद शर्मा और महेश गौहर ने एडवोकेट हरीश शर्मा के   द्वारा ही  दायर की है। कहा है कि रावण महाज्ञानी और परम शिवभक्त ब्राह्मण थे ।  महापंडित भी रावण को कहा गया है । कई लोगों के लिए वे आस्था के प्रतीक हैं। बड़ी संख्या में लोग उन्हें पूजते भी हैं। इतना बड़ा ज्ञानी होने के बावजूद उन्हें बुराई का प्रतीक बना दिया गया है। विशेष रूप से आदिवासी समुदाय के आराध्य देव के रूप में भी रावण को पूजा जाता है ।

प्रत्येक वर्ष दशहरे पर उनका पुतला बनाकर दहन किया जाता है, इसे तुरंत रोका जाए। याचिका में मांग की गई है कि रावण दहन पर स्थायी रोक लगाकर दहन करने वालों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए जाएं। एडवोकेट शर्मा ने बताया कि मामले में 25 सितंबर को सुनवाई होगी।

  • सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर चुकी है इस प्रकार की याचिका……

रावण दहन को लेकर पूर्व में दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुकी है। एडवोकेट शर्मा ने बताया कि यही वजह है कि उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के बजाय जिला कोर्ट में दीवानी केस दायर किया है। वे इस केस में मामले से जुड़े सभी दस्तावेज पेश कर सकेंगे। गौरतलब है कि दीपावली के अगले दिन गौतमपुरा में होने वाले पारंपरिक हिंगोट युद्ध पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई थी, लेकिन याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं मिली।

इधर आदिवासी समुदाय भी लगातार रावण के दहन का विरोध करते आ रहा है ,अब देखना होगा कि आने वाले समय में दुर्गा पूजा के दौरान ही सारे वाकये देखने को मिलेंगे ।

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