पीएमओ द्वारा सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की बातचीत के ऑडियो टेप सुनने के बाद कार्रवाई की गई है। केंद्र सरकार में पदस्थ एक अधिकारी ने यह पुष्टि की है। उनका कहना है कि मंगलवार को पीएमओ ने डीओपीटी के साथ मिलकर वर्मा व अस्थाना द्वारा एक-दूसरे के ऊपर लगाए गए सभी आरोपों, जिनमें ऑडियो टेप, विजिटर रजिस्टर, इंटरकॉम फोन डाटा और एयर टिकट आदि शामिल हैं, की गहराई से जांच-पड़ताल की है।
इसके बाद ही दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेजने की कड़ी कार्रवाई की गई। नाम सामने न आ पाय, इसी शर्त पर उस अफसर ने बताया कि अगस्त और सितंबर 2017 में जब राकेश अस्थाना ने पहली बार आलोक वर्मा पर गंभीर आरोप लगाकर उनकी फाइल कैबिनेट सचिव और सीवीसी को भेजी थी, तब से पीएमओ दोनों अधिकारियों पर नजर रख रहा था। एक खास बात यह है कि दोनों अफसरों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत को रिकॉर्ड भी किया गया था।

केंद्र सरकार के इशारे पर एक एजेंसी ने इनकी बातचीत और देश से बाहर हुई फोन कॉल टेप की हैं। मोईन कुरैशी मामले को लेकर सीबीआई में किसने किसको क्या आदेश दिया , यह सब रिकॉर्ड भी डीओपीटी के पास मौजूद है। बता दें कि इसमें आलोक वर्मा ने कथित तौर से एसआईपी फोन पर सतीश बाबू सना की गिरफ्तारी रोकने का जो आदेश दिया था, वह डीटेल भी पीएमओ के पास है। प्रधानमंत्री कार्यालय को अस्थाना और दुबई में बैठे सोमेश के बीच हुई बातचीत का ब्योरा भी मुहैया कराया गया है।

दोनों अफसरों ने भी एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोपों की जो फाइल पूर्ण तरीके से सीवीसी और डीओपीटी के पास भेजी थी, वह अब इनके खिलाफ कार्रवाई का एक बड़ा आधार बन गई है। बताया गया है कि दोनों ही अफसर सरकारी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के अलावा अन्य फोन से भी बात करते थे। विशेष बात है कि बातचीत के ब्योरे में आलोक वर्मा और उनके चहेते एक डीएसपी की बातचीत भी शामिल है। डीओपीटी के पास यह जानकारी भी है कि वह डीएसपी वर्मा के कमरे या आवास पर कब गया था। संभावित है कि देर-सवेर डीएसपी समेत कुछ और बड़े अफसरों पर गाज गिरे।

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