भोपाल । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज छिंदवाड़ा जिले के दौरे पर है आज शिवराज को छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा तहसील मुख्यालय जाना था लेकिन ख़राब मौसम की वजह से वह अमरवाड़ा नहीं जा पाए दरअसल अमरवाड़ा में श्रमिकों का वृहद सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें तेंदूपत्ता संग्रहको को बोनस का वितरण मुख्यमंत्री के हस्ते किया जाने का कार्यक्रम था चूंकि मौसम की ख़राबी के चलते मुख्यमंत्री फिर सीधे जाखावाड़ी पहुंच गए अभी अभी उन्होंने आदिवासी समुदाय के साथ संवाद किया विभिन्न संगठनों से मुलाकात की जिस आदिवासी समुदाय के लिए विकास की बात प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने हर उद्बोधन में लगभग करते ही है दरअसल छिंदवाड़ा जिले में आदिवासी विकास विभाग में जब से नवागत प्रभारी सहायक आयुक्त जबलपुर से स्थानांतरित होकर छिंदवाड़ा में पदभार ग्रहण की है तब से इस आदिवासी समाज के विकास के लिए बनाया गया इस विभाग का सही मैं मानो कबाड़ा ही हो गया ,इसके उदाहरण भी सबके सामने हैं विगत कुछ दिन पहले एक आदिवासी ने वनाधिकार पट्टा न मिलने से आत्महत्या करने की कोशिश कलेक्टर परिसर में ही कि थी आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त के गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाने के कारण विभाग के कई जनहित के काम अटके पड़े हैं कई ग्राम पंचायत में आदिवासी विकास विभाग से होने वाले निर्माण कार्य की राशि साल भर से नहीं दी गई है जिससे जिले भर की ग्राम पंचायतों में यह कार्य ठप्प हो गए हैं ।

आये दिन आदिवासी विकास विभाग मैं पदस्थ मंड़ल संयोजकों की भ्रष्टाचार से संबंधित खबरें पढ़ने को मिल रही है पर सहायक आयुक्त के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है कुछ शिक्षकों ने तो सीधे सहायक आयुक्त पर ही राशि सहित अन्य कार्यों के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

इसी विभाग के विस्वस्त सूत्रों ने एवं कुछ शिक्षकों ने बताया कि सहायक आयुक्त मेडम ने उन्हें सिर्फ इसलिए निलंबित कर दिया क्योंकि वह आदिवासी समाज के हैं उन्होंने बताया कि हम मेडम के पास अपना पक्ष को रखने गए तो मेडम का कहना था कि तुम गन्दे लोग हो तुमसे बदबू आती है तुमसे कोई बात नहीं करना है कहकर भगा दिया,पिछले दिनों मुख्यमंत्री के पातालकोट मैं भारिया सम्मेलन के दौरान भी तामिया के जनप्रतिनिधियों जनपद पंचायत के सदस्यों द्वारा भी सहायक आयुक्त की शिकायत की गई थी, सूत्र बताते हैं कि सहायक आयुक्त चुन चुन कर दलित समाज और आदिवासी समुदाय के अधिकारियों कर्मचारियों के ऊपर दुर्भवना वश कार्यवाही करने में पीछे नहीं है ।

आखिरकार ऐसे में कैसे होगा आदिवासी समाज का विकास जब ऐसे अपरिपक्व अधिकारी रहेंगे तो इनके कारनामों का खामियाजा भाजपा को भी भुगतना पड़ सकता है ,बताया गया है कि एक सत्ताधारी दल के विधायक को भी सहायक आयुक्त ने कोई भी कोऑपरेट करने से एक मामले में सीधे मना कर दिया था जिससे गुस्से में विधायक जी तमतमा गए थे और मेडम की खबर लेने मैं लग गए थे।

बहरहाल अब देखना होगा कि इन मोहतरमा के कारगुजारियों के किस्से क्या मुख्यमंत्री के कानों तक पहुंच पाते हैं या नहीं और क्या ऐसे संवेदनहीन अधिकारी को मुख्यमंत्री कुछ सबक सिखाने वाले हैं या फिर हमेशा ही तरह आया राम गया राम चलता रहेगा ।

38 thoughts on “मुख्यमंत्री ने की आदिवासी समुदाय से चर्चा ,मगर साहब मेडम ने तो कर दी इनका कबाड़ा”
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