पाकिस्तान में 25 जुलाई को होने वाले आम चुनाव से पहले चुनावी राजनीति की पांच बड़ी बातेंपाकिस्तान में भारत सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा; 14 में  से 7 चुनावों में राजनीतिक दलों की जीत-हार भारत के नाम पर हुई, international news in hindi, world hindi news

पाकिस्तान में 25 जुलाई को आम चुनाव होने वाले हैं। इसके पहले दो अलग-अलग एजेंसियां के ओपिनियन पोल सामने आए हैं। एक में पूर्व क्रिकेटर और अब पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीअाई के नेता इमरान खान की पार्टी को बढ़त मिलती नजर आ रही है। खास बात ये है कि इस आम चुनाव में भारत सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना हुअा है। वहीं, पाकिस्तान में अब तक हुए 14 में से 7 चुनावों में राजनीतिक दलों की जीत-हार भारत के नाम पर हुईं हैं।

1) भारत: अलग-थलग करने का आरोप-पाक चुनावों में हर बार भारत बड़े चुनावी मुद्दों में से एक होता है। सिर्फ भारत के नाम पर ही कई बार पाक में सरकारें बनीं और गिरीं हैं। इस बार भी पीएमएल-एन, पीपीपी कश्मीर मुद्दे को उछाल रही हैं। इमरान रैलियों में कह रहे हैं कि हमने भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ाया, पर वह हमें दुनिया में अलग-थलग करने की नीति पर काम कर रहा है। पीपीपी, पीएमएल-एन 30 साल से भारत पर झूठे आरोप लगाकर चुनावों में जीत हासिल करती रही हैं। 1990, 1993, 1999, 2002 और 2008 के चुनावों में भारत बड़ा मुद्दा रहा। इस बार पार्टियां कुलभूषण जाधव के बहाने भारत पर जासूसी का आरोप भी लगा रही हैं।

2) मीडिया: नवाज पर आवाज दबाने का आरोप-विपक्षी दलों का कहना है कि पीएमएल-एन ने मीडिया की आवाज को दबाने का काम किया है। नवाज और शाहबाज मीडिया संस्थानों को मैनेज करने का काम कर रहे हैं। फौज ने भी ये माना है कि वो लोगों के सोशल मीडिया की गतिविधियों की निगरानी कर रही है।

3) भ्रष्टाचार: 4 साल पहले इमरान ने आजादी मार्च से की थी शुरुआत-पाकिस्तान चुनाव में इस बार सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार है। इसके खिलाफ सबसे ज्यादा पीटीआई चीफ इमरान खान आवाज उठाते रहे हैं। इमरान ने 2014 में तत्कालीन नवाज शरीफ सरकार के खिलाफ आजादी मार्च निकाला था। इसे पाकिस्तान का सबसे बड़ा आंदोलन कहा गया। यह 126 दिन चला था। नवाज के खिलाफ केस करने वालों में इमरान भी शामिल हैं। इसी केस में नवाज को पहले पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा और अब 10 साल की जेल की सजा हुई है। इमरान का कहना है कि 25 जुलाई को अावाम एक नया पाकिस्तान देखेगा। अभी नवाज को 30 हजार करोड़ का हिसाब देना है।

4) विद्रोह: इस्लामिक संगठनों को आश्वासन-2017 में पाक के 9 शहरों में कई इस्लामिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किए थे। पुलिस की कार्रवाई में दर्जन भर से ज्यादा लोग मारे गए थे। मीडिया ने इसे ब्लैक-डे बताया था। अब पार्टियां संगठनों की मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था।

5) सेना: नवाज के खिलाफ साजिश-पाक में सेना ने 20 साल से ज्यादा हुकूमत चलाई है। नवाज के समर्थकों का कहना है कि पाक फौज ने सीक्रेट तरीके से उन्हें पीएम पद से हटवाया है। क्योंकि वह भारत से बेहतर रिश्ते चाहते थे। आर्मी और इमरान इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं। इमरान कहते हैं कि 1990 में पीएमएल-एन को सेना ने ही स्पांसर्ड किया था। मौजूदा सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा सबसे ज्यादा प्रो-डेमोक्रेटिक हैं।

 

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