नई दिल्ली / देश के दस राज्यों  से जिसमे मध्यप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़िसा, तेलंगाना, गुजरात, राज्स्थान, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश के साथ बंगाल बिहार से जय आदिवासी युवा शाक्ति (जयस) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के सड़कों में अपने अधिकारों को लेकर हल्ला बोल किया लोगो ने केन्द्र सरकार से पांचवीं और छठवीं अनसूचि लागू करने, अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 को यथास्थिति बरकार रखने हेतू संसद से विधयक पारित करने, अधिसूचित जनजाति समुदाय के अतिरिक्त अन्य गैर आदिवासी जातियों को को आदिवासीयों का दर्ज देने का प्रस्ताव रद्दा किया जाएं, संविधान में दर्ज अनुसूचित जनजाति शब्द को हटाकर आदिवासी शब्द लिखा जाए, वन अधिकार अधिनियम 2006 को पूर्ण रूप से लागू किया जाए, विश्व आदिवासी दिवस 09 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए, खानिज सम्पदा और उधोग कारखानों के नाम पर 5वी अनसूचि कानून का उल्लंघन कर अपनी ही जमीन से बेदखल किर विस्थापित किये गये 04 करोड़ से अधिक आदिवासी परिवारों को चिन्हित कर उनके सम्मान में संसद में शवेत पत्र लाकर उन्हें पुनर्वास, मुवाजा दिया जाए, अनुसूचित बहुल क्षेत्रों में फैली गंभीर बिमारियों रोकथाम किया जाए, जनजाति छात्रों को उनकी मातृभाषा में सम्पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराया जाए आदि मांगों को लेकर नारे लगाते हुए संसद का घेराव और सभा किया गया,
सभा को सम्बोधित करते हुए जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डाँ हिरालाल अलावा ने कहां कि देश का आदिवासीयों को संविधान में मिले आधिकारों सं वंजित रखा गया है, असंवैधानिक तरीके से उनके जमीनों को छीना गया भाषा संस्कृति में छेड़छाड़ किया गया जिसके कारण आदिवासी समाज में असंतोष पनपी है, सरकार द्वारा इस दूर करने के बजाय उनके क्षेत्रों को नक्सल क्षेत्र घोषित कर वहां के आदिवासायों पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर लगभग 10 लाख आदिवासायों को जेल में डाल दिया गया, Sickle cell, Anaemia, Fluorosis, Silicosis और कुपोषण जैसे गम्भीर बीमारियों से लाखों लोगों की मौत हो गई, शिक्षा और रोजगार के आभाव में लोग पलायन को विवश है, उन्होंने कहां कि आदिवासी युवा समाज लोकसभा और विधानसभा में नेतृत्व परिवर्तन चाहती है अगर हमारी माँगों को तीन महीने के अंदर केन्द्र और राज्य सरकार पूरी नही करती है तो सरकार हटाओं अभियान पूरे देश में चलाया जाएगा ,जयस के झारखंड प्रभारी संजय पहान ने कहां कि हमारे महापुरुषों और वीर पूर्वजों के बलिदान के बाद संविधान में हमारे लिए जो अधिकार तय हुये है जिनमे अनुच्छेद 244(1) के तहत टी.ए.सी प्रदत्त परंपरागत रूढिवादी स्वशासन व्यवस्था अबतक लागू नही है, उनके अधिकार जल-जंगल जमीन को असंवैधानिक तरीके से लेकर उनहें वांजित किया जा रहा है यहीं नही लोकसभा, विधानसभा, प्रमुख, मुखिया, जिला परिषद के लिए आरक्षित पदों को छीनने का प्रयास किया जा रहा है सरकार हमारी माँगों पर अविलंब निर्णय ले नही तो पूरे देश में आंदोलन होगी, सभा को कटराम नरसिम्मा (तेलंगाना) रामनारायण (छत्तीसगढ़) सुरेन्द्र कटारा (राजस्थान) अर्जुन राठवार (गुजरात) अमित तरवी (महाराष्ट्र) राजेश कुमार गोड़ (बिहार) रविराज, अरविंद मुजालदा(मध्यप्रदेश) लशकर सोरेन (सरना धर्मगुरु संथाल परगना) हरादर मुर्मू (सर्वोच्च मांझी संथाल समाज), शयाम लाल मरांडी, मनोज कुमार हेम्ब्रम, शशिकांत उराँव, सुनील हेम्ब्रम एव अन्य ने सम्बोधित किया।

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