जल महल के बारे में

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जल महल राजस्थान के जयपुर शहर में मान सागर झील के मध्य में स्थित है। इसका निर्माण महाराजा प्रताप सिंह ने करवाया था और इसका पुनरोद्धार 18वीं सदी में महाराजा जय सिंह ने करवाया था। हर साल हजारों पर्यटक इस महल को देखने और यहां के शानदार नज़ारे देखने और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने आते हैं। इस झील के किनारे से आप राजपूत शैली की नाव किराए पर ले सकते हैं जो वृंदावन के नाव निर्माता बनाते हैं और आप धीरे धीरे महल तक आ सकते हैं।

इतिहास और वास्तुकला
सोलहवीं सदी में झील का यह इलाका एक प्राकृतिक डिप्रेशन था, जिसका इस्तेमाल पानी जमा करने के लिए किया जाता था। बाद में जबरदस्त सूखा पड़ने के दौरान इस पर शासकों ने पानी के संरक्षण और जमाव के लिए यहां बांध बनवाया। इस प्रकार झील का निर्माण हुआ और महल को पुनर्निर्मित करके इसे मूल रुप दिया गया।

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जल महल के महल की वास्तुकला मुगल और राजपूत शैलियों के संगम को दिखाती है। यह पांच मंजिला इमारत लाल बलुआ पत्थरों से बनी है, जिसकी सिर्फ सबसे उपरी मंजिल पूरी तरह खुली है और दिखाई देती है, बाकी सब मंजिलें पानी में डूबी हैं। पहली मंजिल पर करीने से सजे गलियारे और विशाल कमरे पर्यटकों को उपर जाकर जल महल का सबसे खूबसूरत हिस्सा देखने से पहले ही खुश कर देते हैं। इसकी छतों और दीवारों पर बने चित्र राजपूतों की कहानियां बताते हैं। छत पर एक आयाताकार छतरी है जो बंगाली वास्तुकला से बनाई गई है, जबकि कोनों पर बनी छतरियां अर्द्ध अष्टकोणीय हैं जो कि सुंदर गुंबदों के साथ बनी हैं। शीर्ष मंजिल पर महल का सबसे आकर्षक और खुशबूदार हराभरा बाग स्थित है जिसका नाम चमेली बाग है।

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इसमें सैलानियों के घूमने के लिए संगमरमर के रास्ते बने हैं, साथ ही संगमरमर के प्लेटफाॅर्म बने हैं जिस पर आराम करते हुए इस जगह की शांति का आनंद लिया जा सकता है। बाग के चारों कोनों पर फूलों की आकर्षक क्यारियां बनी हैं। पानी का झरना फूलों की क्यारियों की दीवार से होता हुआ फव्वारे में मिल जाता है जो इस बाग को और ताजगी से भर देता है। बीच में बना हुआ संगमरमर का मंच खुले आसमान के नीचे कला के प्रदर्शन के लिए बना है और इसमें फूलों के ढांचे में 250 मेहमानों के बैठने की जगह है। यहां लगभग 150 किस्मों के पेड़ और पौधे हैं, जैसे अरावली पौधे, ग्राउंड कवर, सजावटी पौधे, सफेद फूलों की कई किस्में जैसे मोगरा, जूही, चमेली, चंपा और कुछ पीपल और बरगद के पेड़ भी हैं जो एक सदी से भी पुराने हैं। इस महल में बादल महल, गुलाब टीबरी, रास निवास टीबरी और आनंद महल टीबरी हैं। पिछले कुछ सालों में इस महल में राजस्थान सरकार ने बहुत मरम्मत करवाई है। पानी का टपकना इस महल की सबसे बड़ी समस्या थी पर मरम्मत के आधुनिक तरीकों के कारण यह बहुत हद तक काबू में आई है। इसकी दीवारों की मरम्मत की गई है और खंभों का पुनर्निमाण किया गया है ताकि इन पर राजपूतों के चित्रों को लगाया जा सके। यात्रियों की सुविधा के लिए सरकार लक्ज़री होटल, शिल्प बाजार, कंवेन्शन सेंटर और खाने पीने की दुकानें खोलने पर भी विचार कर रही है।
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समय
जल महल की यात्रा का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च का है जब मौसम सबसे अनुकूल रहता है। बाकी पूरा साल बहुत गर्म रहता है और विदेशी सैलानियों के लिए यहां की गर्मी और पसीना बहुत मुश्किल कर देता है। जल महल के खुलने का समय सुबह 9 से शाम 6 का है लेकिन आम तौर पर लोगोें को यहां दो घंटे से ज्यादा समय तक अंदर नहीं रहने दिया जाता ताकि भीड़ के इंतजार के समय को कम किया जा सके।

प्रवेश शुल्क
जल महल में प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए 10 रुपये प्रति व्यक्ति है। विदेशी सैलानियों के लिए प्रवेश दर 50 रुपये प्रति व्यक्ति है। कैमरा और वीडियो रिकाॅर्डिंग की दर अलग से है।

स्थान
जल महल जयपुर शहर से 6 किलोमीटर की दूरी पर है।

कैसे पहुंचें
जल महल तक कई तरीकों से पहुंचा जा सकता है। जयपुर-दिल्ली नेशनल हाइवे 8 से इस जगह तक सड़क से पहुंचा जा सकता है। जयपुर केंद्र में स्थित एक शहर है इसलिए यहां व्यवसायिक राजधानी मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से आसानी से पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से 270 किलोमीटर की दूरी कुछ ही घंटों में तय की जा सकती है। बीकानेर के ज़रिए भी जयपुर जा सकते हैं जहां से आमेर सिर्फ 8 किलोमीटर की दूरी पर है। जयपुर या आसपास के शहरों से कैब या प्रायवेट कार से इस खूबसूरत महल तक पहुंचा जा सकता है। राजस्थान राज्य परिवहन निगम द्वारा चलाई जाने वाली बसें भी सैलानियों के लिए उपलब्ध हैं जिनमें उनकी पसंद अनुसार एसी और नाॅन एसी का विकल्प मौजूद है।

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