एक किसान ने खुद को भारतीयसाबित करने को लिए जीवनभर की जमापूंजी का अधिकांश हिस्सा खर्च कर दिया लेकिन वह सिस्टम से जीत नहीं पाया। दो वर्षों तक लगातार संघर्ष करने के बाद आखिर उन्होंने खुद का खत्म कर लिया। मामला असम के उदलगुड़ी जिले से 65 किलोमीटर दूर निचलामारी गांव का है। यहां रहने वाले गोपाल दास पेशे से एक मामूली किसान गोपाल दास ने खुद की भारतीय नागरिता साबित करने का फैसला लिया। पिछले साल उन्होंने अपनी थोड़ी- बहुत जमा पूंजी कानूनी सहायता में खर्च कर दी लेकिन मामला कोर्ट में अभी तक पेंडिंग है।

इसी महीने पुलिस ने गोपाल दास की बेटी शेफाली मालाकर को डी वोटर होने का नोटिस मिला और गोपाल दास को पुलिस ने जांच में खींच लिया। उनके बेटे गणेश ने तंगला थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें गणेश ने आरोप लगाया है कि 6 जून को उदलगुड़ी के विदेशियों के ट्रिब्यूनल में उनके पिता से संदेहास्पद वोटर के मामले को रफा-दफा करने के 15,000 रुपये मांगे गए थे। तब से वह बहुत तनाव में थे और उन्होंने 12 जून को जहर खाकर आत्महत्या कर ली।

गोपल दास के पड़ोसी ने बताया कि दास के परिवार के पास 1965 से लेकर 1971 तक के विरासती दस्तावेज थे। दास ने खुद को भारत का नागरिक साबित करने के लिए अपनी जमापूंजी का अधिकांश हिस्सा खर्च कर दिया लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।

एसपी उदलगुड़ी राजवीर सिंह ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। गोपाल दास से 15,000 रुपये घूस मामले के आरोप की जांच कर रहा है। साथ ही उनके आत्महत्या किए जाने की घटना की जांच भी की जा रही है। इधर सीपीएम की तरफ से इस घटना की न्यायिक जांच कराए जाने की मांग की गई है। सीपीएम के प्रदेश सचिव देबेन भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी ने वादा किया था कि संदेहास्पद वोटर्स का उत्पीड़न खत्म करेगी लेकिन सत्ता में आने के बाद कुछ नहीं हुआ। बिना सबूत के कई लोगों का संदिग्ध मतदाता मानकर शोषण किया जा रहा है।

चार चपोरी साहित्य परिषद के अध्यक्ष हाफिज अहमद ने कहा कि सिस्टम सिर्फ लोगों का उत्पीड़न कर रहा है। जिन लोगों के पास वकील करने के लिए रुपये नहीं हैं वे लोग बहुत परेशान हो रहे हैं। हजारों लोगों को विदेशी घोषित कर दिया गया क्योंकि उनके पास खुद की लड़ाई नहीं लड़ सके। 

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