विश्व प्रसिद्ध मेले में 227 लोग घायल ,कुछ घायलों को नागपुर रिफर ,शराब ने की एक युवक की जान ….

बरसते पत्थर, सर फोड़ती गोफन,  घायल होते लोग, परंपरा के नाम पर पांडुरना में अब तक गोटमार मेले में सैकड़ों लोग अपनी जिंदगी बर्बाद कर चुके हैं । ना जाने कितनी महिलाएं विधवा हुई ना जाने कितनी मांओं की गोद उजड़ी, न जाने कितने लोग अपाहिज हुए,  इसका सही हिसाब रख पाना भी संभव नहीं है ।हर बुद्धिजीवी यह चाहता है की परंपरा के नाम पर अब ये खूनी तमाशा बंद होना चाहिए लेकिन नशे में चूर इन उन्मादी खिलाड़ियों के जोश के सामने प्रशासन भी नतमस्तक हो जाता है और मूकदर्शक बनकर तमाशा देखता रहता है। 

हजारों की तादाद में मौजूद पुलिस फोर्स और प्रशासन के आला अधिकारी इसे रोकने की बजाय सिर्फ खून खराबा कम करने और चिकित्सा व्यवस्था करने में लगे रहते हैं, लेकिन यह उन्माद है कि रुकने का नाम ही नहीं लेता ।सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों अबाध रूप से चला आ रहा पत्थर मारने का खूनी खेल इस विशेष दिन पर यहां मातम का कारण बना हुआ है ।

 गोटमार का यह खूनी खेल 4 सदी से भी अधिक समय से चला आ रहा है । मानव अधिकार आयोग और अधिकारियों की कोशिशों के बावजूद भी यह बर्बरता थमने का नाम नहीं लेती है ।धर्म  के नाम पर खेले जाने वाले इस बर्बर खेल में खुशियों का कोई स्थान ही नहीं है,  अगर है तो सिर्फ बर्बादी ।।मगर फिर भी धार्मिक आस्थाओं के चलते इसे रोकना संभव नहीं हो पाया है जिसकी वजह से हर वर्ष सैकड़ों लोग घायल होते हैं जिनके सही आंकड़े भी प्राप्त नहीं हो पाते हैं क्योंकि प्रशासन भी सही आंकड़ा प्रदर्शित करने से बचता है ।जिसने भी इस खौफनाक खेल को देखा है उसे हर पल बरसते पत्थरों में मौत का तांडव ही दिखाई देता है

यह है गोटमार की कहानी :- गोटमार (गोट याने पत्थर) के पीछे सबसे ज्यादा प्रचलित कहानी प्रेम प्रसंग पर है। बताया जाता है कि पांढुर्ना के युवक को सांवरगांव की युवती से प्रेम हो गया था। वह रात के अंधेरे में युवती को भगा कर लाने के उद्देश्य से सांवरगांव पहुंच गया। वह युवती को भगाकर ले जा रहा था, तब ही सांवरगांव के लोग जाग गए।सांवरगांव के लोगों ने युवती को रोकने के लिए युवक-युवतियों पर पत्थर बरसाना शुरू कर दिया। लोगों ने युवक-युवती पर इतने पत्थर बरसाए कि दोनों युवक-युवती की नदी तट पर ही मौत हो गई।

इस घटना की याद में सदियों से गोटमार का आयोजन चल रहा है। यही परम्परा आज भी चल रही है। आस्था और परम्परागत  रुप से आज फिर जाम नदी के दोनों तट से पत्थर चलने का सिलसिला जारी रहा। प्रशासनकी तमाम कोशिशों के बावजूद भी इस वर्ष एक व्यक्ति की मौत हो गई एवं 300 से अधिक लोग घायल  हो गए जिनमे से 15 की हालत गंभीर बताई जा रही है , 5 लोगों को अति गंभीर होने के कारण नागपुर रेफर किया गया है ।

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