मध्यप्रदेश के हरदा जिले के छोटे से गांव हंडिया की योगिता ने हर्बल साबुन की यूनिट लगाकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को रोजगार से जोड़ा है। समूहों से जुड़ी महिलाओं ने योगिता को ग्राम संगठन प्रमुख बनाया है। वे सभी उनके मार्गदर्शन में आगे बढ़ रही हैं। उनके 15 स्व सहायता समूह में 175 महिलाएं काम कर रही हैं। उन्होने नवकिसान प्रशिक्षण संस्थान नई दिल्ली में 7 दिन की ट्रेनिंग लेकर घर पर ही हर्बल साबुन बनाना शुरू किया है। एमए तक शिक्षित योगिता एकता स्वसहायता के नाम से ग्रामीण महिलाओं के समूह से हर्बल साबुन का निर्माण करा रही हैं। आजीविका का कोई साधन नहीं होने से परिवार की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। अपने पैरों पर खड़ा होने के लिये वे कुछ करना चाहती थी लेकिन रूपयों की कमी आड़े आ जाती थी। योगिता ने अपने जैसी जरूरतमंद व जीवन में कुछ करने की इच्छा रखने वाली 10 महिलाओं को जोड़कर बीते साल जनवरी में एकता आजीविका स्व. सहायता समूह बनाया। जिले का शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूलों में स्वच्छता अभियान के तहत हाथ धोने के लिए योगिता से हर्बल साबुन खरीद रहा है। योगिता ने अपने प्रोडक्ट को भोपाल,दिल्ली,गुजरात और मुंबई तक जाकर बेचा है। योगिता कहती है कि समय-समय पर आजीविका मिशन उसे हर संभव सहयोग देता है। जिससे उसे समूह के प्रोडक्ट को बेचने व प्रचार-प्रसार के भरपूर मौके मिलते है। हरदा के ग्राम हंडिया की रहने वाली योगिता वर्मा आत्म-निर्भर बनने के अपने जूनून की बदौलत एक साल में ही क्षेत्र महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं।पढ़ी लिखी होने के बाद भी कुछ कर नहीं पाने का मलाल उनके दिल में था।शादी के 6 साल गुजरने के बाद योगिता ने ग्रामीण विकास विभाग के ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर नई दिल्ली में हर्बल साबुन बनाने की ट्रेनिंग ली।प्रशिक्षण के बाद योगिता ने घर पर ही साबुन निर्माण शुरू किया।उन्होंने धीरे धीरे आसपास की महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर इस काम से जोडा।कारोबार को बढ़ाने के लिए बैंक से एक लाख का कर्ज लेकर किया यह काम आज एक बड़ा उद्योग बनने जा रहा है।योगिता गांव की अन्य  175 महिलाओं के साथ हर्बल साबुन बनाकर जिले के स्कूलों में देती हैं।इस काम से हर महिला को 5 से 6 हजार रूपये की आमदनी होती है।योगिता वर्मा को मप्र ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने के लिए पुरस्कार भी दिया गया है। योगिता के पति पेशे से मेकेनिक देवीलाल ने योगिता को हर तरह से प्रोत्साहित किया। नतीजा योगिता ने दीगर महिलाओं की मदद कर सफलता पायी और समाज में अपना अलग मुकाम।