पिछले रविवार को अल-क़ायदा नेता अल-ज़वाहिरी की अचानक, मगर पूरी तरह से अप्रत्याशित नहीं, मौत के बाद एक सवाल जो सीधे-सीधे खड़ा होता है, कि उनके संगठन का क्या होगा? बल्कि, सवाल ये है कि अल-क़ायदा है क्या, और मौजूदा समय में इसकी प्रासंगिकता बची भी है या नहीं?इस तरह के सवाल लाजिमी भी है

अरबी में अल-क़ायदा का अर्थ है ”बुनियाद”. यह एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है जो दुनिया भर में पश्चिमी हितों के ख़िलाफ काम करता है. बुनियाद मतलब किसी भी चीज की बुनियाद कड़ी करना या यूँ कहें की नयी इबारत ..

एशिया और अफ़्रीका की वो सरकारें, जो पश्चिमी देशों के क़रीब हैं और जिन्हें अल-क़ायदा ”कम इस्लामिक” मानता है, वहां की सरकारों को प्रभावित करना भी अल-क़ायदा के महत्वपूर्ण एजेंडों में एक है.

ओसामा बिन लादेन (बाएँ) और उनके उत्तराधिकारी आयमन अल ज़वाहिरी(दाएँ) दोनों की अमेरिकी हमले में मौत हो चुकी है

कब हुई अल-क़ायदा की स्थापना?
अल-क़ायदा की स्थापना 1980 के दशक के अंत में अफ़गान-पाकिस्तानी सीमावर्ती इलाकों में हुई थी. इस दौरान अफ़गानिस्तान पर सोवियत संघ का कब्ज़ा था. कई संगठन सोवियत संघ के ख़िलाफ़ काम कर रहे थे. अरबी मुजाहिदीन भी इनमें एक था. अरबी मुजाहिदीन के ही बचे कुछ सैनिकों ने इस संगठन की नींव रखी.

 

 

 

साभार बीबीसी………..