मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से सतीश नागवंशी की रपट………

जिस परिसर में लोग शराब छोड़ने ,नशा छोड़ने की कसमें खाते है और नशा मुक्ति से जुड़े अन्य कार्यक्रम चलते है जिनसे सरकार की सैकड़ों योजनाए स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा संचालित की जाती है , जिनके मार्गदर्शन में इन्हीं नशामुक्ति योजनाओं का करोड़ों रूपये का भुगतान यही के जिलाधीश के आदेश द्वारा भुगतान होते चला आ रहा है दुसरी और इसी परिसर में शराब से सम्बंधित विभाग का भी संचालन इसी परिसर से हो रहा है आज इसी परिसर में अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस की कशमें खाई गई पर वफादारी वही की इसी परिसर से जुड़े हुए आबकारी विभाग का अनुसरण करते हुए शराब के प्याले छलक रहे थे इसी बीच जिलाधीश का अकस्मात आगमन हुआ वहां भी इसी परिसर से जुड़े हुए अधिकारी कर्मचारियों द्वारा शराब के जाम के लिए भी किसी के द्वारा पूछ लिया गया उन्हें यह भी आभास नहीं था की यहाँ कलेक्टर साहब है ये लोग इतने नशे में मदमस्त थे की जिन्हे होश ही नहीं रहा की हम किस जगह बैठकर शराब पी रहे है और दरवाजे पर आया आदमी कौन है आखिर सवाल उठता है की कलेक्टर साहब को पूछने वाला कौन था क्या इन महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी कर्मचारियों शराब में मदमस्तों को कलेक्टर का कोई डर ही नहीं होता जनाब जब कलेक्टर से इनके ही केम्पस के कर्मचारी नहीं डरते तो क्या ख़ाक इनसे जिला संभलेगा यह सवाल बुद्धजीवियों को सहज ही चुभ रहा है
बहरहाल शराब पीने वाले लोगों के ऊपर तलवार लटक रही है सूत्र बताते है की शराब खोरी के इस मामले को दबाने का प्रयाश इसी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कर रहे है जिससे की विभाग की छवि को बट्टा न लग सके जो लोग शराब पी रहे थे उनके खिलाफ कार्यवाही के रूप में कलेक्टर वेदप्रकाश ने नोटिश तो जारी कर दिया है अब देखना होगा की इनके खिलाफ कब तक कार्यवाही और क्या कार्यवाही होती है
बताया तो यह भी गया की बुधवार की शुबह इनके ही महिला एवं बाल विकास विभाग के बड़े अधिकारी कलेक्टर बंगले साहब के बंगले के चक्कर लगाते भी देखे गए है जो इन सारे दरुआ गेंग का नेतृत्व कर रहे थे वो इसलिए की विभाग की छवि खराब न हो

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