एडमिशन के नाम पर ठगी करने वाली कोमल पांडे को उम्रकैद के साथ 10 लाख जुर्माने की सजा

राजधानी की अदालत ने 37 लाख की ठगी की आरोपित कोलार रोड निवासी कोमल पांडे उर्फ रूबी पांडे उर्फ शुभ्रा दत्ता को आजीवन कारावास के साथ 10 लाख 15000 रुपए जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। न्यायाधीश भू-भास्कर यादव ने फैसला देते हुए कहा कि अभियुक्त कोमल की ओर से जमा कराई जाने वाली जुर्माने की राशि में से 10 लाख रुपए प्रतिकार के रूप में फरियादी आर कृष्णमूर्ति वल्द सत्यनारायण को प्रदान की जाए।

सरकारी वकील मंजू जैन सिंह ने बताया कि आरोपित कोमल पर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने के नाम पर छात्र और उसके अभिभावक से 32 लाख रुपए नकद और 5 लाख रुपए के डिमांड ड्राफ्ट ठगने का आरोप है। फरियादी विशाखापट्टनम निवासी आरकेएम राजू ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने बेटे कल्याण के लए कोमल से संपर्क किया था। 32 लाख में सौदा तय हुआ था। आठ मार्च 2012 को रकम दी गई थी।

छात्रों के भविष्य के साथ किया खिलवाड़ इसलिए नरमी नहीं

आरोपित कोमल की ओर से सजा में नरमी बरतने के सवाल पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोमल पांडे ने मेडिकल क्षेत्र के होनहार विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, इसलिए उसका अपराध न केवल देश की आर्थिक बल्कि सामाजिक आधारशिला पर भी कुठाराघात है। इसलिए इस केस में कतई नरमी नहीं बरती जा सकती है।

गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में MBBS में एडमिशन के नाम पर एक और छात्र व उसके अभिभावक से 18 लाख रुपए की ठगी के मामले में कोमल पांडे को जून 2016 में तत्कालीन न्यायाधीश गिरीबाला सिंह की अदालत द्वारा उम्रकैद के साथ 20,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई जा चुकी है।

जानकारी ऑनलाइन लेकर करती थी संपर्क

कोमल और उसके साथी निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS में प्रवेश लेने वाले छात्रों को जानकारी ऑनलाइन लेकर संपर्क करते थे। वे डोनेशन के नाम पर लोगों से लाखों रुपए ठग लेते थे। कोमल के खिलाफ राजधानी के कई थानों में मामले दर्ज हैं। कोमल के गिरोह में कई और लोग भी थे। राजधानी के अलावा मुरैना, सतना, पिपरिया, जबलपुर सहित कई जिलों की पुलिस को कोमल की लंबे समय से तलाश थी। राजधानी के थाना कमला नगर, निशातपुरा और टीटी नगर पुलिस ने उसे अलग-अलग मामलों में जेल से रिमांड पर लिया था।

कोमल को चार धाराओं के तहत पाया दोषी

– कोर्ट ने आरोपित कोमल पांडे को भारतीय दंड विधान की धारा 467 में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास के साथ 5000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

– धारा 468, 471 में दोषी पाते हुए सात साल के कठोर कारवास के साथ 10,000 रुपए जुर्माने की सजा।

– धारा 420 में दोषी पाते हुए सात साल के कठोर कारवास के साथ दस लाख रुपए जुर्माने की सजा।

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