छिंदवाड़ा , जिले का आर्थिक जगत कृषि वनोपज आधारित उद्योग एवं कोयला खदानों तथा शासकीय कर्मचारियों के वेतन पर आश्रित हैं जिसमे सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक भूमिका जिला छिंदवाड़ा के पेंच एवं कन्हान अंचल की होती है किंतु पेंच एवं कन्हान कोयलांचल के 200 करोड़ यानि 2 अरब रुपये की महत्वपूर्ण भूमिका होने के पश्चात भी कोयला खान प्रवंधन की उदासीनता एवं लापरवाही के चलते ओर प्रमोशन एवं कमीशन की फेरियत के कारण कोयला उद्योग घाटे के दौर से गुज़र रहा है , पुरानी कोयला खदाने निरंतर एक के बाद एक बन्द हो रही है, उदाहरणार्थ पेंच क्षेत्र के कोयलांचल की गणपति माइंस , विष्णुपुरी माइंस 1 , विष्णुपुरी माइंस 2, एवं कन्हान कोयलांचल क्षेत्र की भवानी भूमिगत खदान ,मोआरी भूमिगत खदान जहाँ बंद होगई है या बन्द होने के कगार में है वही दूसरी ओर कन्हान छेत्र की धाऊं भूमिगत खदान हर्रा डोल भूमिगत खदान शरदा प्रोजेक्ट आलीवाड़ा भूमिगत खदान टेडी इमली भूमिगत खदान एवं पेंच छेत्र की धन कशा भूमिगत खदान ठेड़गोरा सी ब्लॉक मगराही जैसी महत्वपूर्ण कोयला परियोजनाओं के विलंब होने में कहीं ना कही पीयूष गोयल केंद्रीय कोयला मंत्री एवं राजीवरंजन मिश्र C m D अध्यक्ष शह प्रवंध निदेशक वेकोलि द्वारा अनेको बार भूमि पूजन एवं शिलान्यासः की संपूर्ण तैयारी किये जाने के बाद भी नही खुलना प्रधानमंत्री की संदिग्ध भूमिका की ओर इशारा करता है ,क्योंकि छिंदवाड़ा संसदीय सीट कोंग्रेस का अपराजेय गढ़ रहा है , और कमलनाथ जिले के नेता के क्षेत्र को ऐनकेन प्रकारेण पराजित कर भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के षणयंत्र के चलते जिले के आम आदमी को आर्थिक तंगी के कगार पर खड़ा कर दिया गया है जिससे वेरोजगारी एवं पलायन जैसी भीषण समस्या की त्रासदी की संपूर्ण जिला झेल रहा ह क्षेत्र वीरान एवं उजाड़ होता जा रहा है ,तथा आये दिन लूट खसोट राहजनी अपहरण हत्या जुआ शराब सटा गांजा विक्री हथियारों की तस्करी जैसे अपराधों का ग्राफ चरम सीमा पर है समय रहते विधानसभा चुनाव 2018 एवं लोकसभा चुनाव 2019 के पूर्व नवीन कोयला खदाने नही खोली गई तो इस जिले की रीढ़ की हड्डी अर्थात टूट जाएगी एवं संपूर्ण जिले में आर्थिक मंदी एवं अफरा तफरी का माहौल बनता दिखाई दे रहा है

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