उज्जैन तीर्थ स्थल और पर्यटन स्थल भी है ……….
इस नगर का उल्लेख उपनिषदों तथा पुराणों में भी मिलता है | इसका प्राचीन काल से ही अस्तित्व है | प्राचीन काल में उज्जैन अवंती राज्य(महाजनपद) की राजधानी थी | उस काल में ही स्थान ने नगर का रुप ले लिया था | शकों का दमन करने वाले महाराज विक्रमादित्य की राजधानी भी यही नगरी थी | 10वीं सदी में परमार राजपूतों ने उज्जैन को राजधानी बनाया था, लेकिन बाद में अपनी राजधानी को पहले धार और उसके बाद मांडू में स्थानांतरित कर दिया |

प्राचीनकाल में यह नगर राज्यों की राजधानी के रूप में रहा, लेकिन सल्तनत और मुगल काल में इस नगर को किसी राज्य की राजधानी के रूप में रहा, लेकिन सल्तनत और मुगल काल में यह नगर को किसी राज्य को राजधानी बनाने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ | अकबर के समय में उज्जैन मालवा प्रांत (सूबा) का एक जिला था | इस काल में उज्जैन भारत के प्रमुख शहरों में से एक था | 18 वीं सदी में इस नगर पर पहले मराठों, उसके बाद होल्कर वंश के शासकों का शासन रहा | इसके उपरांत 1818 ई. में यह नगर ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन आ गया | कंपनी ने इसे जिला मुख्यालय बना दिया | उज्जैन में ही कमिश्नरी का मुख्यालय भी है |

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