सबूत के बाद भी नहीं करती है एफ.आई.आर.
ऐसा मामला हुआ अधिवक्ताओं के साथ

छिंदवाड़ा: भारत में ई-टिकट के कारोबार में टिकट माफिया हाबी है, इस बात को पुलिस जानती है लेकिन, पुलिस के आला अफसरों के संरक्षण के कारण इन पर हाथ डालना बड़ा मुष्किल होता है, क्योंकि यह ई-टिकट के नाम पर कई लाखों की हेरा-फेरी कर यात्रियों को लूटा जा रहा है, ई-टिकट पर साइबर क्राइम होते हैं लेकिन, जब पुलिस के समक्ष षिकायतें आती हैं तो पुलिस अपना पल्ला झाड़ते हुए दंड प्रक्रिया संहिता 155 (पुलिस हस्तक्षेप अयोग्य अपराध) की एन.सी.आर. काटकर षिकायतकर्ता को थमा देती है, पुलिस वाले भी इनसे लाभ प्राप्त करते हैं, इसी नियत से इनके अपराध को पकड़ने में और अंकुश लगाने में कोई रूचि नहीं रखते हैं, इसलिए पूरे देष में हर वर्ष कई लाखों यात्रीगण इसका शिकार हो रहे हैं, इसी वजह से शहर के हर कोने में ई-टिकट के अवैध अड्डे संचालित हो रहे हैं, जिस पर पुलिस अंकुष नहीं लगा पा रही है, इस बात का प्रमाण अधिवक्ता श्री अनुपम गढ़ेवाल एवं श्री गोविन्द माहोरे ने दिया है, उन्होंने बताया कि उन्होंने साउथ सिविल लाईन छिंदवाड़ा से गायत्री नेट वल्र्ड ई-टिकट संचालक शैलेष श्रीवास्तव से ई-टिकट नागपुरी से पुरी करवाई, जिसमें 9 एवं 10 प्रतिक्षा सूची थी, संचालक द्वारा बताया गया कि आप जब नागपुर से पुरी वाली रैल में अधिवक्ता अनुपम गढ़ेवाल एवं गोविन्द माहोरे चढ़े तो टिकट क्लीयर नहीं हुई और जब वे ट्रेन के अंदर गए तो वह विडआॅउट टिकट हो गए, जिस पर उन्होंने ट्रेन के अंदर पुनः टिकट टी.टी. से लिया, जिसका रसीद क्रमांक-817261 है जिस पर टी.टी. ने बताया कि आपके साथ ई-टिकट वाले ने धोखाधड़ी की है, क्योंकि जिस दिन टिकट क्लीयर नहीं हुआ, उसी दिन एजेंट के खाते में राषि रेलवे ट्रांसफर कर देती है और एजेंट आपको मोबाइल पर राषि वापस प्राप्त करने के लिए सूचना देता है, इस धोखाधड़ी की शिकायत अधिवक्तागणों ने दिनांक 05/04/2018 को सिटी कोतवाली छिंदवाड़ा में की और संबंधित धोखाधड़ी से समस्त दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद भी पुलिस कहती है कि अपराध घटित नहीं हुआ है तो इस बात को लेकर सी.एम. हेल्प लाईन में षिकायत की गई, तो पुलिस वालों ने सी.एम. हेल्प लाईन में झूठी जानकारी यह दी की अधिवक्तागणों की आपसी रंजिष है, इसीलिए षिकायत निरस्त कर दी जाये, जिस पर अधिवक्तागणों ने पुनः शिकायत की, जिस पर मामला जाँच में लंबित है, पुलिस जानबूझकर अपराधों में अन्वेंषण करने की इच्छुक नहीं होती है, जबकि ई-टिकट में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है और साथ ही साथ अधिवक्तागणों ने साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं और आज दिनांक तक ई-टिकट के संचालक द्वारा उसके खाते में रेलवे से जो राषि प्राप्त हुई है, वह उसे छलकपट कर वापस नहीं कर रहा है, इस बात की जानकारी पुलिस को है, लेकिन पुलिस का कहना है कि इसमें अपराध बनता ही नहीं, जबकि इसमें छलकपट एवं धोखाधड़ी का अपराध प्रमाणित हो रहा है, क्योंकि संबंधित विवेचना अधिकारी आरोपी को बचाने की नियत से काम कर रहा है और आर्थिक लाभ प्राप्त कर चुका है, इसी वजह से अपराध नहीं बनाने को कह रहे हैं और झूठी जानकारी आला अफसरों को पेष कर रहे हैं, जो कि अनुचित है, अधिवक्ता श्री अनुपम गढ़ेवाल और गोविन्द माहोरे ने बताया कि इस बात को लेकर पुलिस अधीक्षक को दंड प्रक्रिया की धारा 156(3) के अंतर्गत सूचना पत्र प्रेषित किया गया है, जिसमें सिटी कोतवाली के थाना प्रभारी एवं विवेचना अधिकारी के विरूव्द्ध कर्तव्यनिष्ठा की अवहेलना एवं भ्रष्ट आचरण की कार्यशैली को लेकर माननीय न्यायालय में धोखाधड़ी का परिवाद प्रस्तुत किया जाएगा।
अधिवक्ता अनुपम गढ़ेवाल एवं गोविन्द माहोरे ने पुलिस अधीक्षक से निवेदन किया है कि ऐसे भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की विभागीय जाँच कर निलंबन की कार्यवाही करना चाहिए, जब अधिवक्ताओं के साथ पुलिस वाले इस प्रकार का व्यवहार करते हैं तो आम जानता को सुनिष्चित ही वह न्याय दिलाने में और उनका पक्ष संरक्षित करने में सक्षम नहीं है, यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेहजनक कई प्रकार के प्रष्न उत्पन्न करता है, इसी वजह से शहर मेें ई-टिकट के अवैध कारोबारियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है, अब देखना यह है कि पुलिस अधीक्षक महोदय किस प्रकार से इन पर अंकुश लगाकर शिजे में लेते हैं।

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