आषाढ़ में सूखाः विज्ञानियों ने कहा सिस्टम नहीं, ज्योतिषी बोले ग्रह रूठे

अमूमन जुलाई-अगस्त को बरसात के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। लेकिन पिछले चार दिनों से आसमान पर बादल तो आ-जा रहे हैं,लेकिन तेज बरसात नहीं हो रही। लोगों को कभी-कभार पड़ने वाली हल्की बौछारों से ही संतोष करना पड़ रहा है। तापमान बढ़ने के साथ ही वातावरण में नमी होने के कारण उमस ने बेचैनी बढ़ा दी है। चिंता की बात है कि अभी तक शहर में सामान्य से 22 प्रतिशत कम पानी गिरा है।

आषाढ़ में पानी न गिरने पर मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अभी कोई मानसूनी सिस्टम नहीं है। उधर ज्योतिषियों का कहना है कि छह ग्रहों के वक्री होने के कारण पानी नहीं गिर रहा है। हालांकि जुलाई के दूसरे सप्ताह में मानसून के मेहरबान होने की संभावना जताई जा रही है।

27 जून को मानसून ने शहर में दस्तक दी थी। इसके तहत 28-29 जून को बौछारें भी पड़ी थीं। 29 जून को आषाढ़ माह शुरू होने के साथ ही आसमान से बादल रुखसत होना शुरू हो गए। हालांकि रोजाना दोपहर बाद बादल आते तो है, लेकिन बरसते नहीं है। इसी क्रम में मंगलवार को भी सुबह से बादल मौजूद थे। सुबह के वक्त करीब 30 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से हवा भी चली। लेकिन बौछारें नहीं पड़ीं। अलबत्ता कुछ स्थानों पर बूंदा-बांदी भर हुई।

मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम विज्ञान अजय शुक्ला ने बताया कि मानसून द्रोणिका (ट्रफ) के पिछले दिनों हिमालय के तराई वाले क्षेत्र की तरफ शिफ्ट हो जाने से राजधानी सहित प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बरसात की गतिविधियां कम हो गई हैं। चार-पांच दिन बाद अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मानसूनी हलचल (सिस्टम) बनने के संकेत मिल रहे है। इसके बाद से फिर बरसात का दौर शुरू हो सकता है।

उधर इस मामले में नेहरू नगर स्थित ज्योतिष मठ संस्थान के संचालक पं. विनोद गौतम ने बताया कि शुक्र ग्रह के सिंह राशि में होने के कारण बरसात का दौर थम गया है। कहावत है कि सिंह,शुक्र जब होय भवानी, चले पवन नहीं बरसे पानी। इसके अलावा मंगल, बुध, गुरू, शनि, राहू और केतू वक्री हो रहे हैं। इस वजह से भी बरसात की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

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