देश में जनजाति के विरूद्ध अत्याचार रोकने के लिये कठोर कानून हैं किन्तु अत्याचार हो रहे हैं विचारणीय चिंतन मनन का विषय है –

उक्ताशय के उदगार सुश्री अनुसुईया उइके, उपाध्यक्ष राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भारत सरकार द्वारा दिनॉंक 29 मार्च 2019 को दूरस्थ ग्रामीण अंचल में स्थित कोरकू जनजाति समाज के ग्राम चौरेपठार में अपने उदबोधन में व्यक्त किये। उन्होंने आगे कहा कि कोरकू जनजाति के व्यक्ति भारिया, बैगा जनजाति से भी पिछड़े हैं और इन्हें अतिपिछड़ी जनजाति की सूची में शामिल किया जाना चाहिए इसके लिये आयोग परीक्षण करवाकर भारत सरकार को सुझाव प्रस्तुत करेगा। ग्रामीणजनों द्वारा अवगत कराया गया कि इस ग्राम में अतिगरीब कोरकू व्यक्त निवास करते हैं और वर्षो पूर्व इनके पूर्वजों के पास जो भूमि थी उसका नामांतरण बॅंटवारा होने के बाद भी वर्तमान वारिषों के नाम पर नहीं हुआ है जिसकी वजह से उनके पूर्वजों के नाम पर बड़ा रकबा दर्ज है जबकि वर्तमान में जो आदिवासी निवासरत हैं उनके पास मुश्किल से एक दो एकड़ जमीन ही बची है और वे गरीब हैं किन्तु उन्हें शासन की किसी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि उनके नाम गरीबी की रेखा की सूची में दर्ज नहीं हो पा रहा है। सुश्री उइके ने आश्वस्त किया कि वे कलेक्टर से चर्चा कर इस क्षेत्र में राजस्व एवं अन्य विभाग के अधिकारियों का एक कैम्प लगवाकर उनकी समस्याओं का निराकरण स्थल पर ही कराने का अनुरोध करेंगीं।
इसी प्रकार से ग्रामीणजनों द्वारा अपनी पेयजल की समस्या से वे अवगत कराया गया। उनका अनुरोध है कि चूॅंकि उनके पूर्वज वर्षो से यहॉं रहते चले आए हैं और जनजाति या अन्य व्यक्ति वहीं बसते थे जहॉं जलश्रोत होता था। यहॉं पर छोटी पहाड़ी के पास झिरना है उसे गहरा एवं चौड़ा करवाकर उससे जल प्रदाय किया जा सकता है। ग्रामीण जनों ने अवगत कराया कि ग्राम में बड़ी संख्या में वृद्ध एवं असक्त पेंशन के लिये पात्र व्यक्ति हैं किन्तु उन्हें पेंशन भी नहीं मिल रही हैं। ग्राम के पात्र व्यक्तियों को पेंशन मिलनी चाहिए इसलिये इस ओर भी पहल की जावे। सुश्री उइके  ने सभी बातें सुनकर उनके लिये कलेक्टर एवं संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर समस्या का निराकरण कराने का आश्वासन दिया गया। इसके साथ उनके द्वारा आयोग के गठन के उद्देश्य, कार्यप्रणाली, उसके कार्य इत्यादि से अवगत करवाकर कोरकू जनजाति को जागरूक करने का प्रयास किया गया।

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