जिले में आजीविका मिशन के तहत संचालित महिला स्व-सहायता समूह की महिलाऐं दिनों-दिन नये आयाम प्राप्त कर रही है। बैंक सखी, बैंक दीदी के रूप में स्थापित होने के बाद अब इन महिलाओं ने खुशबु एवं स्वच्छता के संगम अर्थात ग्लिसरिन युक्त साबुन के क्षेत्र में अपना परचम फहराहने में सफल हुई है। आज जिले में आजीविका मिशन के माध्यम से निर्मित साबुन जिले के साथ-साथ इन्दौर, खण्डवा, खरगोन के 15 हजार से अधिक स्कूलो में सप्लाई हो रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से हो रहे इस कार्य ने आजीविका मिशन की इन बहनजियों को आर्थिक सम्पन्नता के साथ नई मंजिल प्रदान की है।
आजीविका मिशन प्रभारी हिमांशु शुक्ला बताते है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों में साबुन सप्लाई के लिए बड़वानी जिले का चयन किया है। जिसके तहत 4 जिले बड़वानी, इन्दौर, खण्डवा, खरगोन की 15 हजार से अधिक स्कूलों में 78 हजार से अधिक साबुन का सप्लाई इस वित्तीय वर्ष के अंतिम 4 माह में किया गया है। इससे आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को रोजगार के नये आयाम प्राप्त हुये है।
शुक्ला ने बताया कि महिलाओं के लगन को देखते हुये साबुन निर्माण के कारखाने विकासखण्ड बड़वानी के भीलखेड़ा, अम्बापानी में, विकासखण्ड राजपुर के खजूरी, सनगॉव में, विकासखण्ड पानसेमल के मोयदा, जलगॉव में, विकासखण्ड निवाली के गवाड़ी निवाली में, विकासखण्ड पाटी के वेरवाड़ा में, विकासखण्ड सेंधवा के धनोरा, सेमलिया में, विकासखण्ड ठीकरी में विकासखण्ड मुख्यालय में प्रारंभ करवाये गये है। इसके कारण जहॉ साबुन सप्लाई में सहूलियत हो रही है वही समस्त विकासखण्डों की महिलाओं को आगे लाने में भी मदद मिल रही है। क्योंकि जिले में संचालित अन्य आजीविका मिशन की दीदियॉ अपने क्षेत्र में संचालित इन साबुन कारखानो में पहुंचकर देखने एवं सीखने का कार्य सरलता से कर पा रही है।
आजीविका मिशन प्रभारी  शुक्ला बताते है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़वानी का चयन इस आधार पर किया है कि यहॉ साबुन बनाने के कार्य में पूर्व से कई समूह संलग्न है। जिसके कारण यहॉ पर साबुन बनाने के कारखानों की संख्या ज्यादा व क्वालिटी अन्य स्थानों से अच्छी है। जबकि साबुन का रेट बाजार भाव से 20 फीसदी कम व बाजार में मिलने वाले साबुन की आपेक्षा केमिकल की मात्रा 80 फीसदी कम है।

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