मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिला बैतूल  में आदिवासीयों की कला संस्कृति को जीवित बनाये रखने के लिए आयोजित होने वाले आयोजनों में से एक आदिरंग महोत्सव का आयोजन की कड़ी में आज जिले में आदिम जाति अनुसंधान विकास संस्था भोपाल एवं वन्या जनजातीय कार्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जनजातीय नृत्य-संगीत एवं शिल्प कलाओं पर केन्द्रित तीन दिवसीय उत्सव आदिरंग-2018 के तीसरे दिन विभिन्न जिलों से आए जनजातीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन जिला पंचायत अध्यक्ष  सूरजलाल जावलकर एवं उपाध्यक्ष  नरेश फाटे द्वारा किया गया। इस दौरान विधायक घोड़ाडोंगरी मंगलसिंह धुर्वे, जिला योजना समिति सदस्य  जितेन्द्र कपूर एवं नगर पालिका अध्यक्ष अलकेश आर्य विशेष रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम में आदिवासी बालक छात्रावास बैतूल के बालकों द्वारा ठाठिया नृत्य एवं बैतूल के कलाकारों द्वारा आदिवासी लोकनृत्य की प्रस्तुति दी गई। इसके अलावा मण्डला जिले के  राजीव मिश्रा के दल द्वारा बैगा नृत्य, डिण्डोरी जिले की  कलीबाई द्वारा पंडवानी प्रसंग का गायन, बैतूल जिले के श्री बसंत कवड़े द्वारा डंडार नृत्य, श्योपुर जिले के  रामलाल सेमरिया द्वारा सहरिया नृत्य एवं झाबुआ जिले की श्रीमती मंगला गरवाल द्वारा भील नृत्य की प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम का संचालन  डीडी उइके एवं  कृष्णा हजारे द्वारा किया गया। इस दौरान आदिम जाति अनुसंधान विकास संस्था भोपाल के संयुक्त संचालक  नीतिराज सिंह, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास बीएस बिसौरिया सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद थे।

2 thoughts on “आदिरंग के तीसरे दिन भी जनजातीय संस्कृति पर आधारित नृत्यों की रही धूम”
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