आदर्श ग्राम योजना : सांसदों के कार्यों का मूल्यांकन करेंगे प्रोफेसर

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सांसदों द्वारा किए गए कार्यों का मूल्यांकन डॉ. हरीसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर

करेंगे। प्रधानमंत्री सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने करीब 4 साल पहले अपने-अपने क्षेत्र के एक-एक गांव को गोद लिया था।

दोनों राज्यों में कुल 54 गांव गोद लिए गए थे। इन गांवों में सांसदों ने कितना काम कराया है? अब इसका मूल्यांकन किया जाना है। केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस काम का जिम्मा सागर के डॉ. हरीसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय को सौंपा है।

सोमवार को ही मंत्रालय ने मूल्यांकन के लिए विश्वविद्यालय को एप्रूवल दिया है। विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों को 6 माह के अंदर इन 54 गांवों का मूल्यांकन कराकर रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंपनी है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मूल्यांकन के लिए टीमें गठित कर दी है। इसी माह के अंत तक मूल्यांकन का कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा।

मूल्यांकन का यह रहेगा पैरामीटर

सांसद के कार्यों का मूल्यांकन पिछले चार सालों में केन्द्र सरकार द्वारा चलाई गई विभिन्ना योजनाओं का लाभ इन 54 गांवों के ग्रामीणों को कितना मिला? इस आधार पर किया जाना है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मूल्यांकन के पैरामीटर तय कर विश्वविद्यालय को बता दिए है। प्रोफेसरों ने बताया कि ग्रामीणों को केन्द्र सरकार की योजनाओं की जानकारी कितनी है, किन योजनाओं का लाभ उन्हें मिला, किन योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिला? इन पैरामीटर पर मूल्यांकन किया जाना तय किया गया है।

टीम में इनको मिली जिम्मेदारी

दोनों राज्यों के सांसद के कामों के मूल्यांकन के लिए डॉ. हरीसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरपी तिवारी ने 11 सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें समाजशास्त्र विभाग से प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत, प्रो. कालीनाथ झा, प्रो. जीएम दुबे, हिस्ट्री से प्रो. अशोक अहिरवार, पॉलीटिकल साइंस से प्रो. अनुपमा कौशिक, एजुकेशन से प्रो. रानी दुबे, कॉमर्स से प्रो. जीएल पुणताम्बेकर को कोर कमेटी के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। मानवशास्त्र विभाग के एचओडी प्रो. केकेएन शर्मा को कॉर्डिनेटर और प्रॉ?टर प्रो. एपी दुबे को सलाहकार बनाया गया है।

इसी माह शुरू होगा मूल्यांकन

सांसद आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत आने वाले इन 54 गांवों के मूल्यांकन के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन 8 नए पदों पर भर्ती करेगा। इनमें रिसर्च असिस्टेंट का एक, इन्वेस्टीगेटर के 6 व डेटा एंट्री ऑपरेटर का एक पद शामिल है। इन पदों पर भर्ती होते ही इसी माह से इन गांवों के मूल्यांकन का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

टीम के सदस्यों को इन गांवों में जाकर घूम-घूम कर लोगों से सांसदों द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी एकत्रित करनी है। सभी गांवों से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद विश्वविद्यालय एक फाइनल रिपोर्ट तैयार करेगा। जिसे कुलपति दिल्ली जाकर ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों को सौंपंेगे।

नए पदों पर भर्ती के बाद शुरू करेगें मूल्यांकन

आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गए गांवों के मूल्यांकन के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने विश्वविद्यालय को स्वीकृति दे दी है। कुलपति ने एक 11 सदस्यीय कोर कमेटी का गठन भी कर दिया है। इस कार्य के लिए 8 नए पदों पर भर्ती भी की जानी है।

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