झारखंड के जमशेदपुर शहर में चल रहे 11 अनाथाश्रम की जांच में शनिवार को चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। इनमें 12 ऐसे बच्चों के बारे में पता चला है, जिन्हें गोद लेने वालों का नाम उस संस्था के रजिस्टर में नहीं है। उसकी जगह सिर्फ अंकल और आंटी ही लिखा है। अब जांच टीम उन संस्थाओं से यह जानने की कोशिश कर रही है कि जिन लोगों को अंकल और आंटी बताते हुए उन्हें बच्चे सौंपे गए हैं, वह लोग कौन हैं।

नाम पते में गड़बड़ी: सूत्रों के अनुसार अनाथश्रमों में बच्चों के लेन-देन में गड़बड़ियां मिली हैं। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी जिन लोगों को बच्चे दिए गए उनमें कुछ के नाम और पते तो ठीक से हैं, लेकिन कइयों में नाम हैं तो उसका पूरा पता नहीं है। पूरा पता है तो नाम ठीक से नहीं है।

जांच में लगेंगे 10 से 12 दिन और: इधर, शुक्रवार को भी गठित कमेटी की जांच जारी रही। इसमें अब अधिवक्ता और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्य पवन कुमार को शामिल किया गया है। उम्मीद है कि जांच को 10 से 12 दिन और लगेंगे। प्रत्येक बच्चे का भौतिक सत्यापन हो रहा है। जांच टीम के प्रभारी सिटी डीएसपी अनुदीप सिंह अपनी रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपेंगे।

हर महीने सौंपे रिपोर्ट: शनिवार को इस मामले में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद ने डालसा सचिव एसएन सिकदर,  बाल संरक्षण कल्याण पदाधिकारी चंचल कुमारी, सीडीपीओ, बाल कल्याण कमेटी की अध्यक्ष पुष्पा रानी तिर्की व  सदस्य की उपस्थिति में सभी बाल संरक्षण संस्थान के संचालकके साथ बैठक की। इस बैठक मे संस्थान के संचालकों को निर्देश दिया गया कि वह प्रतिमाह अपनी रिपोर्ट जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को सौंपे। पदाधिकारी उस रिपोर्ट को डालसा को देंगी। साथ ही किस संस्थान में कितने बच्चे हैं। कम से उनका रिकार्ड बनना शुरू किया गया। इसकी भी जानकारी ली।

Leave a Reply

Your email address will not be published.