प्रतिबंध के बाद भी धड़ल्ले से बिक रही पालीथिन
छिंदवाड़ा। एक ओर नगर निगम क्षेत्र में पालीथिन के पैकेट में सामान लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर नगर निगम क्षेत्र में धड़ल्ले से पालीथिन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में नवदुनिया की टीम ने जब शहर का जायजा लिया तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई, प्रतिबंध के बावजूद सिंगल यूज प्लास्टिक का धड़ल्ले से छिंदवाड़ा (नवदुनिया प्रतिनिधि)। एक ओर नगर निगम क्षेत्र में पालीथिन के पैकेट में सामान लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर नगर निगम क्षेत्र में धड़ल्ले से पालीथिन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में नवदुनिया की टीम ने जब शहर का जायजा लिया तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई, प्रतिबंध के बावजूद सिंगल यूज प्लास्टिक का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था। सामान्य तौर पर तो कहीं पालीथिन नजर नहीं आती है, लेकिन बारीकी से देखो तो पता चला कि धड़ल्ले से पालीथीन का इस्तेमाल करते हुए दुकानदार नजर आ रहे हैं। सब छुपाकर पालीथिन का इस्तेमाल कर रहे हैं। खासतौर पर फल, सब्जी, किराना दुकानों में बड़े पैमाने पर लोग पालीथिन का इस्तेमाल करते नजर आए। वहीं नरसिंहपुर रोड, गल्ला बाजार और बुधवारी क्षेत्र में छोटे कारोबारी धड़ल्ले से पालीथीन का इस्तेमाल करते नजर आए। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक पालीथीन का इस्तेमाल नहीं करना है, हालांकि जिन भी दुकानों में पालीथिन का इस्तेमाल किया जा रहा है, उन पर कार्रवाई की जाएगी। एक दुकानदान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पालीथिन के ही दाम इन दिनों बढ़े हुए हैं, ऐसे में पालीथिन के विकल्प के तौर पर अगर कपड़े या कागज के बैग खरीदते हैं तो काफी खर्च होगा, ऐसे में इतना व्यय करने की क्षमता छोटे दुकानदारों में नहीं हैं। वहीं ग्राहक भी पालीथिन की मांग करते हैं। गौरतलब है कि मई 2017 से प्रदेश में पालीथिन बैग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। उस वक्त नगर निगम ने 87 क्विंटल कैरीबैग जब्त करके नष्ट किए थे।

दुकानदार हैं बेखौफ

ऐसा नहीं है कि नगर निगम के अधिकारी कर्मचारियों को इस बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण हालत जस की तस है। जिसके कारण शहर में पालीथिन धड़ल्ले से चल रही है। दुकानदार बेखौफ, चोरी छिपे अब भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न तो ग्राहकों को बैग लाने की जरूरत पड़ रही और न ही इकोफ्रेंडली कैरीबैग का चलन बढ़ पा रहा है। शहर की दुकानों में अलग-अलग तरीके से दुकानदार पालीथिन देते नजर आए। किसी ने जेब से निकाली तो कोई पैसों की बोरी में फंसा रखी है। ज्यादातर फुटकर दुकानदार 10-20 पालीथिन ही अपने पास रखते हैं। शेष ऐसी जगह में रखी जाती है जहां से वे आसानी से मंगा सकें। वहीं थोक दुकानदार अब भी चेहरा पहचानकर आराम से फुटकर दुकानदारों को पॉलीथिन की सप्लाई कर रहे हैं। ज्यादातर दुकानदार कैरीबैग की झंझट से बचने के लिए पैकिंग की पॉलीथिन का इस्तेमाल करने लगे हैं, जबकि इन्हें सामान रखकर सील्ड होना चाहिए।